सरकारी कार्यालयों में जोहो ईमेल प्लेटफॉर्म अनिवार्य, सर्वर रहेगा देश के भीतर
भोपाल। बढ़ते साइबर हमलों और अनधिकृत एक्सेस के खतरों से निपटने के लिए राज्य सरकार ने अपनी इंटरनेट संचार व्यवस्था में बड़ा व सख्त बदलाव किया है। नई नीति के तहत प्रदेश के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए विदेशी क्लाउड प्लेटफॉर्म के बजाय पूरी तरह स्वदेशी मेल प्लेटफार्म जोहो का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है।
केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रोजेक्ट के तहत यह कदम उठाया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य सरकारी डेटा की सुरक्षा मजबूत करना और विदेशी सर्वरों पर निर्भरता समाप्त करना है। राजधानी भोपाल में राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम और एनआईसी की उच्च स्तरीय बैठक के बाद जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब सभी आधिकारिक ईमेल संचार केवल जोहो प्लेटफॉर्म के माध्यम से ही होंगे।
डोमेन में कोई बदलाव नहीं
इस बदलाव से अधिकारियों के मौजूदा ईमेल पतों का डोमेन (आईडी का पिछला हिस्सा) नहीं बदलेगा। बैकएंड इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्वर अब गूगल या माइक्रोसॉफ्ट के बजाय भारत में स्थित जोहो के सुरक्षित क्लाउड पर शिफ्ट होंगे। प्रत्येक मेल-बॉक्स के मेंटेनेंस पर राज्य सरकार प्रति यूजर 2,000 रुपये वार्षिक सेवा शुल्क का भुगतान करेगी।
45 दिन लॉगिन न करने पर अकाउंट होगा निष्क्रिय
सुरक्षा के कड़े मानकों के तहत अब हर यूजर को महीने में कम से कम एक बार अपनी ईमेल आईडी का उपयोग करना अनिवार्य होगा। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी लगातार 45 दिनों तक लॉगिन नहीं करता है, तो उसका खाता सुरक्षा कारणों से स्वतः ही निष्क्रिय कर दिया जाएगा।
देश के भीतर सुरक्षित रहेगा संवेदनशील डेटा
भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी जोहो के सर्वर पूरी तरह से भारत में ही स्थित हैं। यह प्लेटफॉर्म एनआईसी के रणनीतिक नियंत्रण में कार्य करता है तथा सीईआरटी-इन के सुरक्षा ऑडिट एवं जीरो-ट्रस्ट आर्किटेक्चर नियमों का पालन करता है। इससे मध्य प्रदेश सरकार का संवेदनशील डेटा पूरी तरह देश की सीमाओं के भीतर सुरक्षित रहेगा।
