मतदाता सूची में सुधार, अब सरकारी दफ्तरों के चक्करों से मिलेगी मुक्ति
भोपाल। निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के ’स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (विशेष गहन पुनरीक्षण) अभियान के तहत आम जनता को बड़ी राहत दी है। अब उन मतदाताओं को तहसील या वार्ड कार्यालयों की दौड़ नहीं लगानी होगी, जिनका डेटा पुराने रिकॉर्ड से मैच नहीं हो रहा था। आयोग ने ’’बीएलओ ऐप’’ में ’मैपिंग’ का विकल्प दोबारा शुरू कर दिया है, जिससे डेटा सुधार की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और आसान हो जाएगी।
बीएलओ ऐप में मैपिंग विकल्प बहाल होने से अब वर्ष 2003 की मतदाता सूची के आधार पर वोटर्स के नाम सीधे लिंक किए जा सकेंगे। यदि किसी मतदाता या उसके माता-पिता का नाम 2003 के रिकॉर्ड में मिल जाता है, तो बीएलओ उसे तुरंत ऐप के माध्यम से सत्यापित कर देगा। इस तकनीकी बदलाव के बाद मतदाताओं को व्यक्तिगत रूप से सुनवाई के लिए उपस्थित होने की जरूरत नहीं रहेगी। राजधानी भोपाल जिले की सात विधानसभा सीटों (बैरसिया, उत्तर, नरेला, मध्य, दक्षिण-पश्चिम, गोविंदपुरा और हुजूर) में वर्तमान में 1,16,925 मतदाता ’नो मैपिंग’ श्रेणी में चिन्हित हैं। अब तक 75 हजार लोगों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। करीब 8 हजार मतदाता अपने दस्तावेज पेश कर सत्यापन करा चुके हैं। शेष मतदाताओं के लिए अब बीएलओ ऐप के जरिए घर बैठे सत्यापन की राह आसान हो गई है।
