कभी अलविदा ना कहना पर करण जौहर बोले, फिल्म देख बीच में ही थिएटर छोड़ गया था एक कपल
मुंबई. करण जौहर की चर्चित फिल्म ‘कभी अलविदा ना कहना’ अपनी रिलीज के 20 साल पूरे करने जा रही है. फिल्म की 20वीं वर्षगांठ के मौके पर करण जौहर ने इससे जुड़ी कुछ ऐसी यादें साझा की हैं, जिन्हें सुनकर एक बार फिर फिल्म को लेकर पुरानी बहस तेज हो गई है. वर्ष 2006 में रिलीज हुई इस फिल्म में विवाहेतर संबंधों और रिश्तों में भावनात्मक दूरी जैसे संवेदनशील विषयों को केंद्र में रखा गया था. फिल्म में शाहरुख खान, रानी मुखर्जी, अभिषेक बच्चन, प्रीति जिंटा और अमिताभ बच्चन जैसे बड़े कलाकार नजर आए थे. रिलीज के समय फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली थी, लेकिन समय के साथ यह फिल्म एक खास दर्शक वर्ग के बीच चर्चित और लोकप्रिय फिल्म बन गई.
करण जौहर ने सोशल मीडिया पर फिल्म से जुड़ी कई पुरानी घटनाओं को याद करते हुए बताया कि फिल्म देखने के दौरान दर्शकों की प्रतिक्रियाएं उनके लिए कई बार बेहद अप्रत्याशित रही थीं. उन्होंने कहा कि फिल्म को लेकर उन्हें उस समय तारीफ के साथ-साथ तीखी आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा. कुछ दर्शकों ने इसे साहसी फिल्म बताया तो कुछ ने इसे भारतीय पारिवारिक मूल्यों के खिलाफ माना.
करण जौहर ने फिल्म के एक विशेष प्रदर्शन की घटना साझा करते हुए बताया कि वह थिएटर में दर्शकों के बीच बैठकर फिल्म देख रहे थे. इसी दौरान फिल्म में शाहरुख खान और रानी मुखर्जी के किरदारों के बीच अंतरंग दृश्य आया. करण के मुताबिक, उनके आगे एक पारंपरिक पोशाक पहने अधेड़ उम्र का दंपती बैठा था. दृश्य शुरू होते ही दोनों की प्रतिक्रिया बदल गई. करण ने बताया कि पति को जब यह समझ आया कि फिल्म में दिखाया जा रहा दृश्य कोई सपना नहीं बल्कि कहानी का वास्तविक हिस्सा है, तो वह नाराज हो गया और उसने अपनी पत्नी को वहां से चलने का संकेत दिया.
करण के अनुसार, इसके बाद वह दंपती फिल्म खत्म होने से पहले ही थिएटर से बाहर चला गया. करण ने बताया कि उस समय उन्हें यह देखकर काफी झटका लगा और उनका दिल बैठ गया. फिल्म के विषय को लेकर दर्शकों की असहजता का यह अनुभव उनके लिए लंबे समय तक यादगार रहा.
करण ने एक अन्य घटना भी साझा की, जिसमें एक महिला अपनी बेटी के साथ फिल्म देखने पहुंची थी. महिला ने फिल्म को लेकर करण के सामने नाराजगी जताई. करण के मुताबिक, महिला को उम्मीद थी कि उनकी बेटी के साथ वह एक ऐसी फिल्म देखेंगी जिसमें गीत, संगीत और पारिवारिक मूल्यों पर आधारित कहानी होगी. लेकिन फिल्म की कहानी और विवाहेतर संबंधों के चित्रण से वह बेहद नाराज हो गईं.
करण ने बताया कि उस महिला ने उनसे सवाल किया कि उन्होंने ऐसी फिल्म क्यों बनाई. महिला ने अपनी निजी जिंदगी से जुड़ा संदर्भ देते हुए कहा कि जिस दिन उसका तलाक हुआ, उसी दिन उसने यह फिल्म देखी और फिल्म की कहानी ने उसे और परेशान कर दिया. करण ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि महिला की नाराजगी देखकर उन्हें लगा कि कहीं वह उन पर गुस्सा न निकाल दें, इसलिए वह वहां से हट गए.
‘कभी अलविदा ना कहना’ की कहानी दो ऐसे दंपतियों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनके वैवाहिक रिश्ते समय के साथ भावनात्मक रूप से कमजोर पड़ते जाते हैं. देव और माया के किरदारों में शाहरुख खान और रानी मुखर्जी नजर आए थे, जबकि अभिषेक बच्चन और प्रीति जिंटा ने ऋषि और रिया की भूमिका निभाई थी. फिल्म में यह दिखाया गया था कि विवाह के भीतर मौजूद भावनात्मक दूरी किस तरह व्यक्ति को दूसरे रिश्ते की ओर खींच सकती है.
फिल्म का सबसे विवादित पक्ष यही था कि क्या कहानी विवाहेतर संबंध को सही ठहराती है या उसके परिणामों को सामने रखती है. रिलीज के समय इस मुद्दे पर काफी बहस हुई थी. करण जौहर ने अब स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य कभी भी विवाहेतर संबंधों को बढ़ावा देना या उनका समर्थन करना नहीं था.
करण ने स्वीकार किया कि फिल्म में कई कमियां थीं. उन्होंने माना कि फिल्म जरूरत से ज्यादा लंबी थी और इसमें भव्य गीतों तथा कई दृश्यों को लेकर भी दर्शकों की अलग-अलग राय रही. इसके बावजूद उनका कहना है कि फिल्म बनाते समय उनकी भावना और उद्देश्य स्पष्ट था. उनके अनुसार फिल्म का मूल उद्देश्य यह दिखाना था कि विवाह की सीमाओं से बाहर जाकर प्रेम या इच्छा की तलाश करने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं और इससे व्यक्ति का परिवार तथा जीवन की बुनियाद तक प्रभावित हो सकती है.
करण के इस बयान को फिल्म के पुराने विवाद के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. फिल्म ने जिस समय विवाहेतर संबंध जैसे विषय को मुख्यधारा के बड़े हिंदी सिनेमा में उठाया था, उस दौर में इसे लेकर काफी चर्चा हुई थी. दर्शकों का एक वर्ग इसे रिश्तों की जटिलता को समझने वाली साहसी फिल्म मानता था, जबकि दूसरे वर्ग ने इसे पारंपरिक भारतीय पारिवारिक मूल्यों के विपरीत बताया था.
रिलीज के दो दशक बाद करण जौहर का कहना है कि आज भी उन्हें इस फिल्म को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं मिलती रहती हैं. उनके अनुसार, समय बीतने के साथ दर्शकों का फिल्म को देखने का नजरिया भी बदला है. जो फिल्म रिलीज के समय विवादों में घिरी थी, वही अब कई लोगों के लिए ऐसी फिल्म बन चुकी है, जिस पर रिश्तों, विवाह और व्यक्तिगत इच्छाओं को लेकर चर्चा की जाती है.
‘कभी अलविदा ना कहना’ करण जौहर के निर्देशन करियर की तीसरी फिल्म थी. इससे पहले उन्होंने ‘कुछ कुछ होता है’ और ‘कभी खुशी कभी गम’ जैसी सफल फिल्मों का निर्देशन किया था. ‘कभी अलविदा ना कहना’ के जरिए उन्होंने पारिवारिक मनोरंजन की अपनी स्थापित छवि से अलग हटकर रिश्तों के अधिक जटिल और संवेदनशील पहलू को पर्दे पर उतारने की कोशिश की थी.
फिल्म में शाहरुख खान और रानी मुखर्जी की जोड़ी ने कहानी के भावनात्मक पक्ष को केंद्र में रखा, जबकि अभिषेक बच्चन और प्रीति जिंटा के किरदारों ने वैवाहिक रिश्ते के दूसरे पहलू को सामने रखा. अमिताभ बच्चन ने भी फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. फिल्म के गीत-संगीत और भव्य प्रस्तुति ने भी इसे उस दौर की चर्चित फिल्मों में शामिल किया.
करण जौहर की पिछली निर्देशित फिल्म ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ वर्ष 2023 में रिलीज हुई थी. रणवीर सिंह और आलिया भट्ट अभिनीत इस फिल्म को दर्शकों ने पसंद किया और फिल्म ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में भी सम्मान हासिल किया.
दो दशक बाद ‘कभी अलविदा ना कहना’ को याद करते हुए करण जौहर ने फिल्म की कमियों को स्वीकार करने के साथ उसके मूल विचार का भी बचाव किया है. उनके मुताबिक फिल्म का उद्देश्य विवाहेतर संबंधों का समर्थन करना नहीं था, बल्कि ऐसे रिश्तों से होने वाले भावनात्मक और पारिवारिक नुकसान को सामने रखना था. दर्शकों की उस दौर की तीखी प्रतिक्रियाओं से लेकर आज तक जारी बहस यह बताती है कि फिल्म ने भले ही विवाद पैदा किया हो, लेकिन उसने रिश्तों और विवाह को लेकर समाज में एक महत्वपूर्ण चर्चा जरूर छेड़ी थी.
