कुपोषण के खिलाफ डिजिटल पहल, भावनी पोर्टल से जुड़ेगी सामाजिक सहभागिता
बच्चों की निजता सुरक्षित रखते हुए पारदर्शी तरीके से पहुंचाई जाएगी सीधी मदद’
भोपाल। प्रदेश में कुपोषण के विरुद्ध जारी लड़ाई को अब तकनीक और जन-भागीदारी के जरिए एक नई दिशा मिल रही है। राज्य में सरकारी प्रयासों को मजबूती देने के लिए समाज, स्वयंसेवी संस्थाओं और दानदाताओं को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से भावनी पोर्टल की शुरुआत की गई है। यह डिजिटल मंच न केवल कुपोषण का सामना कर रहे बच्चों को मददगारों से जोड़ता है, बल्कि सहायता मिलने के बाद बच्चे के स्वास्थ्य और पोषण स्तर में हो रहे सुधार की निरंतर मॉनिटरिंग भी सुनिश्चित करता है।
महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रणालियों से सत्यापित आंकड़ों के आधार पर पोर्टल काम करता है। बच्चों की निजता को ध्यान में रखते हुए उनकी व्यक्तिगत पहचान सार्वजनिक नहीं की जाती, बल्कि अनामरूप में ही जानकारी प्रदर्शित होती है। मार्गदर्शक पोर्टल पर समग्र आईडी के साथ या उसके बिना पंजीयन कर अपने नजदीकी क्षेत्र के बच्चों की सूची देख सकते हैं। बच्चे की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार सहायता का प्रकार तय होता है, जिसके बाद एक विशिष्ट सहायता पहचान क्रमांक जारी किया जाता है।
मदद के बाद भी निरंतर निगरानी
पोर्टल पर सहायता देने के बाद प्रक्रिया समाप्त नहीं होती। मेरे बच्चों की सूची विकल्प के माध्यम से साप्ताहिक या मासिक आधार पर बच्चे की पोषण प्रगति का अपडेट देखा जा सकता है, जिससे सहायता का स्पष्ट और पारदर्शी अभिलेख तैयार होता है।
सरकारी तंत्र और समाज के बीच सेतु
प्रशासनिक स्तर पर पोर्टल के जरिए यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि किन बच्चों तक मदद पहुंच रही है और उनकी स्थिति में क्या सुधार आया है। इससे सरकारी प्रयासों को सामुदायिक सहभागिता से अधिक व्यापक बनाया जा रहा है।
आईटी सेल द्वारा 2022 में हुआ विकसित
इस पोर्टल का निर्माण सूचना प्रौद्योगिकी प्रकोष्ठ, मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, भोपाल द्वारा वर्ष 2022 में किया गया था। इसका मूल उद्देश्य प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। तकनीक और मानवीय संवेदनाओं का यह अनूठा संगम राज्य में कुपोषण उन्मूलन के अभियानों को एक सशक्त आधार प्रदान कर रहा है।
