शिक्षकों का धरना जारी, मांगे पूरी न होने तक आंदोलन रहेगा जारी
भोपाल। प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के विरोध में शिक्षकों का आक्रोश लगातार गहराता जा रहा है। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले नीलम पार्क में आयोजित संभागवार धरना-प्रदर्शन के तीसरे दिन मंगलवार को ग्वालियर-चंबल संभाग के शिक्षकों ने हुंकार भरी। प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक राज्य सरकार उनकी समस्याओं पर ठोस बातचीत कर समाधान नहीं निकालती, तब तक यह आंदोलन अनवरत जारी रहेगा।
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आवेदन की तारीख बढ़ाए जाने के बावजूद शिक्षकों के बहिष्कार के कारण आवेदनों की रफ्तार बेहद धीमी है। प्रदेश में लगभग डेढ़ लाख पात्र शिक्षकों में से अब तक मात्र 30 हजार के करीब ही फॉर्म भरे गए हैं। कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) जहां दिसंबर में ही परीक्षा कराने की तैयारियों में जुटा है, वहीं आवेदनों की कम संख्या को देखते हुए अंतिम तारीख 5 अक्टूबर के बाद एक बार फिर आगे बढ़ाए जाने की संभावना जताई जा रही है।
शिक्षकों की प्रमुख मांगें
मोर्चा के प्रदेश संयोजक राकेश नायक के अनुसार, प्रदेश में अलग-अलग समय पर हुई शिक्षक नियुक्तियां टीईटी के दायरे में नहीं आती हैं। सरकार को तमिलनाडु की तरह विधानसभा से विधेयक पारित कर प्रस्ताव केंद्र को भेजना चाहिए, कई शिक्षकों की नियुक्ति वर्षों पुरानी होने के बावजूद उनकी सेवा अवधि की गणना 2018 से की जा रही है। इससे शिक्षकों की वरिष्ठता, ग्रेच्युटी और अन्य वित्तीय लाभ सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। मांग है कि 20 साल से अधिक की पूरी सेवा अवधि को मान्यता दी जाए। मोर्चा का आरोप है कि डिजिटल हाजिरी (ई-अटेंडेंस) प्रक्रिया में शिक्षकों का निजी डेटा सुरक्षित नहीं है, जिससे कई शिक्षक साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। इसलिए इसे अनिवार्य के बजाय स्वैच्छिक बनाया जाए।
25-30 साल सेवा दे चुके शिक्षकों से परीक्षा क्यों?
मोर्चा संयोजक नायक ने दावा किया कि शुरुआत में हुए 2500 आवेदनों में अधिकांश निजी स्कूलों के शिक्षक शामिल थे। अब तक का आंकड़ा भी बहिष्कार के चलते काफी कम है। शिक्षकों का कहना है कि 25 से 30 वर्षों तक शिक्षा व्यवस्था को संभालने के बाद अब पात्रता परीक्षा लिया जाना अनुचित है। सरकार को परीक्षा थोपने के बजाय पहले शिक्षकों की सेवा अवधि और नियुक्ति से जुड़े पुराने मुद्दों का स्थायी समाधान करना चाहिए।
