तबादला नीति पर रार, 95 फीसदी शिक्षकों को नहीं मिलेगा लाभ
ई-अटेंडेंस, जनगणना ड्यूटी और 3 साल की शर्त का विरोध
भोपाल। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 19 जून से शुरू की जा रही शिक्षकों की ऑनलाइन स्वैच्छिक तबादला प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही बड़े विवादों में घिर गई है। आवेदन के लिए मात्र पांच दिनों 23 जून तक की समय-सीमा और विभाग की अत्यंत कड़ी शर्तों के कारण प्रदेश के करीब 95 प्रतिशत शिक्षकों के हाथ से तबादले का मौका छिनने की कगार पर है। इस नीतिगत कड़ाई को लेकर प्रदेश भर के शिक्षक संगठनों में असंतोष और आक्रोश गहराता जा रहा है।
शासकीय शिक्षक संगठन मध्य प्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल का दावा है कि नियमों की जटिलता के कारण अधिकांश शिक्षक इस प्रक्रिया का लाभ उठाने से पूरी तरह वंचित रह जाएंगे। संगठन ने इसके पीछे मुख्य रूप से तीन कड़े नियमों को जिम्मेदार ठहराया है। कौषल के अनुसार विभाग ने ट्रांसफर के लिए 90 प्रतिशत ऑनलाइन हाजिरी अनिवार्य की है। शिक्षकों का तर्क है कि ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क न होने और तकनीकी गड़बड़ियों के कारण कई बार उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाई, जिसका खामियाजा अब उन्हें भुगतना पड़ रहा है। वहीं वर्तमान में प्रदेश के करीब 75 प्रतिशत शिक्षक जनगणना कार्य में तैनात हैं। नए नियमों के तहत जनगणना ड्यूटी में लगे शिक्षकों के ट्रांसफर नहीं किए जाएंगे। यहां तक कि पूर्व में जारी हो चुके प्रशासनिक तबादला आदेश भी इस ड्यूटी के कारण स्वतः निरस्त माने जाएंगे। जिन शिक्षकों को सेवा में अभी 3 साल पूरे नहीं हुए हैं, उन्हें इस पूरी प्रक्रिया से सीधे बाहर कर दिया गया है।
नियमों में ढ़ील देने की मांग
शासकीय शिक्षक संगठन ने राज्य सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग से मांग की है कि इन जमीनी और व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए ई-अटेंडेंस, जनगणना ड्यूटी और 3 साल की सेवा अवधि की शर्तों में तुरंत ढील दी जाए, ताकि वर्षों से परेशान शिक्षकों को सही मायने में राहत मिल सके।
