कांग्रेस ने याद दिलाई बदहाल शिक्षा, कुपोषण और पलायन की हकीकत
पटवारी ने राष्ट्रपति को पत्र के जरिए उठाए आदिवासी हित के मुद्दे
भोपाल। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पांच दिवसीय मध्यप्रदेश दौरे के बीच सूबे की सियासत गरमा गई है। एक तरफ जहां इंदौर एयरपोर्ट पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति का भव्य स्वागत किया, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष ने इस दौरे के बहाने राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति के नाम एक खुला पत्र जारी कर प्रदेश के आदिवासी समाज की बदहाली की जमीनी हकीकत बयां की है।
पटवारी ने पत्र में लिखा कि करीब 1.53 करोड़ जनजातीय आबादी वाले मध्यप्रदेश में अब केवल कागजी योजनाओं और घोषणाओं से आगे बढ़कर संवैधानिक न्याय को धरातल पर उतारने की जरूरत है। उन्होंने झाबुआ, अलीराजपुर, धार और मंडला सहित 14 प्रमुख आदिवासी जिलों में बुनियादी सुविधाओं की बेहद चिंताजनक स्थिति को रेखांकित किया है। कांग्रेस ने सीधे तौर पर राज्य की स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। पत्र में उल्लेख किया है कि आदिवासी क्षेत्रों में साक्षरता दर राज्य के औसत से काफी कम, मात्र 50 प्रतिशत के आसपास है। स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं और छात्रावासों की स्थिति दयनीय है। इन क्षेत्रों में कुपोषण, एनीमिया, मातृ-शिशु मृत्यु दर और सहरिया जैसी विशेष पिछड़ी जनजातियों में टीबी की समस्या महामारी की तरह फैली है। स्थानीय स्तर पर रोजगार न होने और पारंपरिक आजीविका के साधन सिकुड़ने से आदिवासी युवा बड़े पैमाने पर पलायन को मजबूर हैं।
पेसा कानून पूरी तरह लागू करवाएं
कांग्रेस अध्यक्ष ने राष्ट्रपति से अपनी संवैधानिक शक्तियों का उपयोग करते हुए राज्य सरकार को पेसा और वनाधिकार कानून को पूरी तरह लागू करने, रिक्त पदों पर समयबद्ध भर्ती करने और आदिवासियों की स्थिति की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय आयोग गठित करने के निर्देश देने का आग्रह किया है।
