तेहरान पर अमेरिकी इजरायली हमले से हालात विस्फोटक विश्वविद्यालय और एयरपोर्ट बने निशाना
तेहरान. मध्य पूर्व में जारी तनाव अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है, जहां अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान की राजधानी तेहरान पर किए गए ताजा हवाई हमलों ने हालात को और अधिक विस्फोटक बना दिया है. शुक्रवार को हुए इन हमलों में तेहरान के प्रमुख शैक्षणिक संस्थान शाहिद बेहेश्ती विश्वविद्यालय और मेहराबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई है. ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, इन हमलों से कई महत्वपूर्ण इमारतों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है, हालांकि अभी तक हताहतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है.
बताया जा रहा है कि उत्तरी तेहरान के वेलेंजहक इलाके में स्थित शाहिद बेहेश्ती विश्वविद्यालय पर किए गए हमले से वहां के शैक्षणिक और अनुसंधान कार्यों को गंभीर क्षति पहुंची है. यह विश्वविद्यालय ईरान के प्रमुख उच्च शिक्षा और शोध संस्थानों में गिना जाता है, जहां हजारों छात्र और शोधकर्ता कार्यरत हैं. इसके अलावा पश्चिमी तेहरान में स्थित मेहराबाद एयरपोर्ट पर भी हमले की सूचना है, जिससे हवाई सेवाओं और यातायात पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. इन हमलों को मौजूदा संघर्ष का बड़ा विस्तार माना जा रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हमले केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहकर अब नागरिक और अनुसंधान संस्थानों को भी निशाना बना रहे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों और युद्ध के नियमों पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं. इससे पहले भी हाल के दिनों में तेहरान स्थित कई स्वास्थ्य और शोध संस्थानों पर हमले किए गए थे, जिनमें पाश्चर संस्थान प्रमुख रूप से शामिल है. यह संस्थान लंबे समय से जैव चिकित्सा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाता रहा है. ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए इसे वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा पर सीधा हमला करार दिया है.
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इन घटनाओं पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील की है. उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि अस्पतालों, दवा कंपनियों और शोध संस्थानों पर हमले मानवता के खिलाफ अपराध हैं और इस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन, रेड क्रॉस और अन्य वैश्विक संस्थाओं को तत्काल संज्ञान लेना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की कार्रवाई न केवल ईरान बल्कि पूरी दुनिया की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए खतरा है.
इसी बीच, अमेरिकी और इजरायली पक्ष की ओर से इन हमलों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सीमित रही है, लेकिन रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह कार्रवाई ईरान के सैन्य और रणनीतिक नेटवर्क को कमजोर करने के उद्देश्य से की जा रही है. हालांकि, इन हमलों के कारण क्षेत्रीय तनाव और अधिक बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. पहले से ही दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और हालात तेजी से युद्ध जैसी स्थिति की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं.
सूत्रों के मुताबिक, हाल के हमलों में तेहरान की एक फार्मास्युटिकल रिसर्च कंपनी को भी निशाना बनाया गया था, जिससे ईरान ने इसे युद्ध अपराध करार दिया है. वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी ईरान में स्वास्थ्य सुविधाओं पर लगातार हो रहे हमलों को लेकर चिंता जताई है और इसे गंभीर मानवीय संकट का संकेत बताया है. संगठन का कहना है कि इस तरह के हमले न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य तंत्र को भी प्रभावित कर सकते हैं.
इस पूरे घटनाक्रम के बीच आम नागरिकों में भय और असुरक्षा का माहौल बढ़ता जा रहा है. तेहरान के कई इलाकों में लोग अपने घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं, जबकि सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं. एयरपोर्ट और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर निगरानी बढ़ा दी गई है. साथ ही, इंटरनेट और संचार सेवाओं पर भी आंशिक नियंत्रण की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे सूचनाओं के प्रवाह पर असर पड़ रहा है.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस स्थिति को लेकर चिंता बढ़ रही है. कई देशों ने संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है, लेकिन जमीनी हालात फिलहाल किसी भी तरह की नरमी के संकेत नहीं दे रहे हैं. यदि यह संघर्ष इसी तरह आगे बढ़ता रहा, तो इसका असर न केवल मध्य पूर्व बल्कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है.
तेहरान पर हुए ये ताजा हमले इस बात का संकेत हैं कि क्षेत्र में तनाव अब खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है और आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है. दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बढ़ते संकट को थामने में कोई प्रभावी भूमिका निभा पाएगा या फिर यह टकराव और बड़े संघर्ष का रूप ले लेगा.
