तमिलनाडु में जन्मी भारतीय मूल की रिनी संपत ने वाशिंगटन डीसी मेयर चुनाव में ठोकी दावेदारी
अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में होने वाला मेयर चुनाव इस बार खास वजह से चर्चा में है. भारतीय मूल की 31 वर्षीय रिनी संपत ने चुनावी मैदान में उतरकर न केवल अपनी पहचान बनाई है, बल्कि दक्षिण एशियाई समुदाय के लिए एक नया इतिहास रचने की दिशा में कदम बढ़ाया है. वह प्राइमरी चुनाव के बैलेट पेपर पर जगह बनाने वाली पहली दक्षिण एशियाई उम्मीदवार बन गई हैं, जिससे भारत और अमेरिका दोनों जगह उनके नाम की चर्चा तेज हो गई है.
रिनी संपत का जन्म भारत के तमिलनाडु में हुआ था. जब वह मात्र सात वर्ष की थीं, तब उनका परिवार अमेरिका चला गया. इसके बाद उनकी पूरी शिक्षा-दीक्षा अमेरिका में ही हुई. पिछले एक दशक से अधिक समय से वह वाशिंगटन डीसी में रह रही हैं और यहीं उन्होंने अपना पेशेवर करियर स्थापित किया है.
पेशे से रिनी संपत एक सरकारी कॉन्ट्रैक्टर हैं, जो विभिन्न सरकारी परियोजनाओं से जुड़े कार्य करती हैं. उन्होंने खुद को पारंपरिक राजनेता से अलग बताते हुए कहा है कि कभी-कभी सिस्टम के बाहर से आने वाले लोग भी शहर की समस्याओं को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं और उनका समाधान निकाल सकते हैं.
राजनीतिक सफर की शुरुआत करते हुए उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से मेयर पद के लिए चुनाव लड़ने का फैसला किया. खास बात यह रही कि उन्होंने महज चार हफ्तों के भीतर जरूरी संख्या में समर्थकों के हस्ताक्षर जुटाकर प्राइमरी चुनाव के बैलेट में अपनी जगह पक्की कर ली. यह उपलब्धि उन्हें इस पद के लिए पहली दक्षिण एशियाई उम्मीदवार बनाती है.
उनका चुनावी अभियान “Fix the Basics” थीम पर आधारित है, जिसका अर्थ है शहर की बुनियादी समस्याओं को प्राथमिकता से हल करना. उनके एजेंडे में सड़कों के गड्ढों को भरना, 911 इमरजेंसी सेवा के रिस्पॉन्स टाइम को कम करना और पोटोमैक नदी में गंदे पानी के रिसाव को रोकना शामिल है. उनका मानना है कि जब तक बुनियादी ढांचा मजबूत नहीं होगा, तब तक शहर का समग्र विकास संभव नहीं है.
वाशिंगटन डीसी की राजनीति में लंबे समय से डेमोक्रेटिक पार्टी का दबदबा रहा है. 1975 से शुरू हुए मेयर चुनावों के इतिहास में अब तक कोई रिपब्लिकन उम्मीदवार यहां जीत हासिल नहीं कर पाया है. ऐसे में रिनी संपत की एंट्री को केवल एक चुनावी प्रयास नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य का संकेत माना जा रहा है.
वह इसलिए भी चर्चा में हैं क्योंकि उन्होंने साफ कहा है कि वह किसी विशेष हित समूह से जुड़ी नहीं हैं और पूरी तरह स्वतंत्र सोच के साथ चुनाव लड़ रही हैं. उनका फोकस केवल शहर के लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं को हल करने पर है.
भारतीय मूल की रिनी संपत का यह कदम कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. तमिलनाडु से निकलकर वाशिंगटन डीसी की राजनीति तक पहुंचने वाली उनकी यह यात्रा प्रेरणादायक भी है और ऐतिहासिक भी. अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि उनका यह अभियान आने वाले चुनाव में कितना असर डालता है और क्या वह वास्तव में नया इतिहास रच पाती हैं.
