बलात्कार की शिकार पीड़िताओं को दिया 37 लाख 75 हजार का मुआवजा
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दो साल में 45 आदिवासी महिलाएं हुई बलात्कार की शिकार
भोपाल। राज्य के छिंदवाड़ा और पांढुर्णा जिले में बीते दो सालों में 45 आदिवासी महिलाएं बलात्कार की शिकार हुई। इन महिलाओं को शासन की नीति के अनुसार 37 लाख 75 हजार रूपए का मुआवजा वितरित किया गया।
प्रदेश के लोकसभा क्षेत्र छिंदवाड़ा के अंतर्गत वर्तमान में दो जिले छिंदवाड़ा और पांढुर्णा आते है। इन जिलों में साल 2023 और 20224 में अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति वर्ग लोगों के खिलाफ अलग-अलग मामले दर्ज हुए हैं। इनमें पांढुर्णा जिला ना बनने के पहले छिंदवाड़ा जिले में साल 2023 में 4851 प्रकरण दर्ज किए गए थे। इनमें से पुलिस ने 4839 मामलों में चालान पेश किया है, जबकि 12 मामलों में अब तक चालान पेश नहीं किया गया है। इन मामलों में पुलिस ने 3117 मामलों में अपराधियों को सजा दिलाई है। जबकि 34 को बरी कर दिया गया है। वहीं 1688 मामलों में अपराधियों पर कार्यवाही विचारण में है। इसी तरह 2024 में 3178 मामले अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति वर्ग के खिलाफ दर्ज किए गए थे। इनमें 3164 मामलों में अदालत में चालान पेश किया गया। वहीं 1066 मामलों में सजा दिलाई गई और 2099 मामले विचारण में है।
छिंदवाड़ा से अलग हुए पांढुर्णा जिले में 2023 में इन वर्ग के खिलाफ 646 मामले दर्ज किए गए। सभी मामलों में अदालत में चालान पेश किया गया। इनमें से 525 में सजा दी गई, जबकि 1 प्रकरण में आरोपी को बरी किया गया है। 120 मामले अब भी विचारण में है। इसी तरह 2024 में 646 मामले इस जिले में दर्ज किए गए, जिनमें से 643 मामलों में अदालत में चालान पेश किया गया। इनमें से 484 मामलों में सजा दिलाई गई, जबकि 159 मामले विचारण में है।
बलात्कार के 45 मामले
आदिवासी वर्ग की महिलाओं के साथ दोनों जिलों में साल 2023 एवं 2024 में 45 मामले घटित हुए। इनमें 2023 में 23 प्रकरण और 2024 में 22 प्रकरण दर्ज किए गए थे। 2023 में आदिवासी वर्ग की बलात्कार पीड़ित महिलाओं को बाइस लाख पच्चहत्तर हजार रूपए का मुआवजा वितरित किया गया। जबकि 2024 में 22 पीड़ित महिलाओं को चौदह लाख पिच्चहत्तर हजार रूपए का मुआवजा वितरित किया गया।
भोपाल। राज्य के छिंदवाड़ा और पांढुर्णा जिले में बीते दो सालों में 45 आदिवासी महिलाएं बलात्कार की शिकार हुई। इन महिलाओं को शासन की नीति के अनुसार 37 लाख 75 हजार रूपए का मुआवजा वितरित किया गया।
प्रदेश के लोकसभा क्षेत्र छिंदवाड़ा के अंतर्गत वर्तमान में दो जिले छिंदवाड़ा और पांढुर्णा आते है। इन जिलों में साल 2023 और 20224 में अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति वर्ग लोगों के खिलाफ अलग-अलग मामले दर्ज हुए हैं। इनमें पांढुर्णा जिला ना बनने के पहले छिंदवाड़ा जिले में साल 2023 में 4851 प्रकरण दर्ज किए गए थे। इनमें से पुलिस ने 4839 मामलों में चालान पेश किया है, जबकि 12 मामलों में अब तक चालान पेश नहीं किया गया है। इन मामलों में पुलिस ने 3117 मामलों में अपराधियों को सजा दिलाई है। जबकि 34 को बरी कर दिया गया है। वहीं 1688 मामलों में अपराधियों पर कार्यवाही विचारण में है। इसी तरह 2024 में 3178 मामले अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति वर्ग के खिलाफ दर्ज किए गए थे। इनमें 3164 मामलों में अदालत में चालान पेश किया गया। वहीं 1066 मामलों में सजा दिलाई गई और 2099 मामले विचारण में है।
छिंदवाड़ा से अलग हुए पांढुर्णा जिले में 2023 में इन वर्ग के खिलाफ 646 मामले दर्ज किए गए। सभी मामलों में अदालत में चालान पेश किया गया। इनमें से 525 में सजा दी गई, जबकि 1 प्रकरण में आरोपी को बरी किया गया है। 120 मामले अब भी विचारण में है। इसी तरह 2024 में 646 मामले इस जिले में दर्ज किए गए, जिनमें से 643 मामलों में अदालत में चालान पेश किया गया। इनमें से 484 मामलों में सजा दिलाई गई, जबकि 159 मामले विचारण में है।
बलात्कार के 45 मामले
आदिवासी वर्ग की महिलाओं के साथ दोनों जिलों में साल 2023 एवं 2024 में 45 मामले घटित हुए। इनमें 2023 में 23 प्रकरण और 2024 में 22 प्रकरण दर्ज किए गए थे। 2023 में आदिवासी वर्ग की बलात्कार पीड़ित महिलाओं को बाइस लाख पच्चहत्तर हजार रूपए का मुआवजा वितरित किया गया। जबकि 2024 में 22 पीड़ित महिलाओं को चौदह लाख पिच्चहत्तर हजार रूपए का मुआवजा वितरित किया गया।
