महंगाई भत्ता, स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ देने की मांग
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पेंशनर्स ने सौंपा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन
भोपाल। प्रदेश के पांच लाख पेंशनर्स ने अपनी मांगों की ओर शासन का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने जुलाई 2024 से केंद्रीय कर्मचारियों के समान 53 प्रतिशत महंगाई भत्ते, राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49(6) हटाने, आयुष्मान योजना की पात्रता उम्र 62 वर्ष से शुरू करने या अलग स्वास्थ्य बीमा योजना लागू करने की मांग की है। इसे लेकर पेंशनरों ने आज शुक्रवार को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
प्रोग्रेसिव पेंशनर्स एसोसिएशन मध्य प्रदेश के अध्यक्ष ओमप्रकाश बुधौलिया कहते हैं कि राज्य के पेंशनर्स चाहते हैं कि उन्हें भी केंद्रीय दर से 53 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिले। मध्य प्रदेश पेंशन नियम 1976 में संशोधन किया जाए। साथ ही पेंशनर की मृत्यु के बाद अविवाहित, परित्यक्ता, विधवा पुत्री और दिव्यांग संतानों को आजीवन पारिवारिक पेंशन मिले। कार्यकारी प्रांताध्यक्ष एलएन कैलासिया कहते हैं कि राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49(6) पेंशनर्स के लिए बड़ी बाधा बन रही है। यह धारा वित्तीय लाभ में देरी का कारण बनती है। पेंशनर्स इस धारा को हटाने की मांग कर रहे हैं। वृद्धावस्था में बीमारी और दवाइयों के खर्च बढ़ जाते हैं। धन के अभाव में कई पेंशनर्स उचित इलाज नहीं करा पाते हैं। मुख्यमंत्री इन समस्याओं का समाधान करें।
भोपाल। प्रदेश के पांच लाख पेंशनर्स ने अपनी मांगों की ओर शासन का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने जुलाई 2024 से केंद्रीय कर्मचारियों के समान 53 प्रतिशत महंगाई भत्ते, राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49(6) हटाने, आयुष्मान योजना की पात्रता उम्र 62 वर्ष से शुरू करने या अलग स्वास्थ्य बीमा योजना लागू करने की मांग की है। इसे लेकर पेंशनरों ने आज शुक्रवार को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
प्रोग्रेसिव पेंशनर्स एसोसिएशन मध्य प्रदेश के अध्यक्ष ओमप्रकाश बुधौलिया कहते हैं कि राज्य के पेंशनर्स चाहते हैं कि उन्हें भी केंद्रीय दर से 53 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिले। मध्य प्रदेश पेंशन नियम 1976 में संशोधन किया जाए। साथ ही पेंशनर की मृत्यु के बाद अविवाहित, परित्यक्ता, विधवा पुत्री और दिव्यांग संतानों को आजीवन पारिवारिक पेंशन मिले। कार्यकारी प्रांताध्यक्ष एलएन कैलासिया कहते हैं कि राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49(6) पेंशनर्स के लिए बड़ी बाधा बन रही है। यह धारा वित्तीय लाभ में देरी का कारण बनती है। पेंशनर्स इस धारा को हटाने की मांग कर रहे हैं। वृद्धावस्था में बीमारी और दवाइयों के खर्च बढ़ जाते हैं। धन के अभाव में कई पेंशनर्स उचित इलाज नहीं करा पाते हैं। मुख्यमंत्री इन समस्याओं का समाधान करें।
