फिल्म फेस्टिवल के पोस्टर का किया विमोचन
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भोपाल। सतपुड़ा चलचित्र समिति और विश्व संवाद केंद्र, मध्यप्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में 8-9 मार्च को ग्वालियर में ’ग्वालियर फ़िल्म फेस्टिवल’ का आयोजन किया जा रहा है। फेस्टिवल के पोस्टर का विमोचन आज राजधानी में किया गया। इस अवसर पर प्रख्यात अभिनेता संजय मेहता, फ़िल्म समीक्षक विनोद नागर और सतपुड़ा चल चित्र समिति के अध्यक्ष लाजपत आहूजा उपस्थित रहे।
इस अवसर पर आहूजा ने कहा कि यह फ़िल्म फेस्टिवल मध्यप्रदेश का है। इसमें प्रदेश के फिल्मकारों को अवसर मिलेगा। उनकी श्रेष्ठ फिल्मों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि फेस्टिवल में फ़िल्म विधा से जुड़े विशेषज्ञ फ़िल्म निर्माण में रुचि रखने वालों से संवाद भी करेंगे। इसके साथ ही अभिनेता संजय मेहता ने कहा कि फिल्मों का विषय समाज को प्रेरणा देने वाला होना चाहिए। अक्सर हम ऐसे विषयों का चयन कर लेते हैं, जिनका न तो समाज से सरोकार होता है और न ही वे समाज का प्रबोधन करती हैं। विश्वास है कि सतपुड़ा चल चित्र समिति और यह फ़िल्म फेस्टिवल अच्छी फिल्मों के निर्माण के लिए युवाओं को प्रोत्साहित करेंगे। वहीं, फ़िल्म समीक्षक विनोद नागर ने कहा कि स्थानीयता हमें आकर्षित करती हैं। अपने शहर की लोकेशन फिल्मों में देखकर मन आनंदित होता है। उन्होंने कहा कि फ़िल्म फेस्टिवल में प्रदेश के स्थानीय युवाओं को पुरस्कृत किया जाना चाहिए, जो सीमित संसाधनों में फ़िल्म निर्माण कर रहे हैं।
इस अवसर पर आहूजा ने कहा कि यह फ़िल्म फेस्टिवल मध्यप्रदेश का है। इसमें प्रदेश के फिल्मकारों को अवसर मिलेगा। उनकी श्रेष्ठ फिल्मों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि फेस्टिवल में फ़िल्म विधा से जुड़े विशेषज्ञ फ़िल्म निर्माण में रुचि रखने वालों से संवाद भी करेंगे। इसके साथ ही अभिनेता संजय मेहता ने कहा कि फिल्मों का विषय समाज को प्रेरणा देने वाला होना चाहिए। अक्सर हम ऐसे विषयों का चयन कर लेते हैं, जिनका न तो समाज से सरोकार होता है और न ही वे समाज का प्रबोधन करती हैं। विश्वास है कि सतपुड़ा चल चित्र समिति और यह फ़िल्म फेस्टिवल अच्छी फिल्मों के निर्माण के लिए युवाओं को प्रोत्साहित करेंगे। वहीं, फ़िल्म समीक्षक विनोद नागर ने कहा कि स्थानीयता हमें आकर्षित करती हैं। अपने शहर की लोकेशन फिल्मों में देखकर मन आनंदित होता है। उन्होंने कहा कि फ़िल्म फेस्टिवल में प्रदेश के स्थानीय युवाओं को पुरस्कृत किया जाना चाहिए, जो सीमित संसाधनों में फ़िल्म निर्माण कर रहे हैं।
