कर्नल सोफिया कुरैशी मामला, मंत्री शाह की बर्खास्तगी की मांग, राज्यपाल को पत्र
मांगी अभियोजन की मंजूरी, तबादलों में भ्रष्टाचार के भी लगाए गंभीर आरोप
भोपाल। कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी के मामले में मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह की प्रशासनिक व कानूनी मुश्किलें गहराती जा रही हैं। पूर्व आईएफएस अधिकारी एवं सिस्टम परिवर्तन अभियान के अध्यक्ष आजाद सिंह डबास ने राज्यपाल मंगूभाई पटेल को पत्र लिखकर मंत्री शाह को मंत्रिमंडल से तत्काल बर्खास्त करने और उनके खिलाफ आपराधिक केस चलाने (अभियोजन) की मंजूरी देने की मांग की है।
डबास ने राज्यपाल को भेजे गए 28 पन्नों के विस्तृत पत्र में उल्लेख किया है कि मई 2025 में कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए विवादित बयान के बाद हाईकोर्ट के स्वतः संज्ञान पर मानपुर थाने में बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। पत्र का सबसे संवेदनशील पहलू यह दावा है कि राज्य कैबिनेट ने विजय शाह पर मुकदमा चलाने की अनुमति न देने का निर्णय लिया है। चूंकि कैबिनेट की बैठकों के मिनट्स मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बाद राज्यपाल के पास भेजे जाते हैं, इसलिए डबास ने राज्यपाल से संविधान प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए अभियोजन की मंजूरी देने और पुलिस महानिदेशक को मंत्री की गिरफ्तारी के निर्देश देने का आग्रह किया है। पत्र में यह भी रेखांकित किया गया है कि इस पूरे प्रकरण में 31 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है।
मंत्री के कार्यकाल पर भी उठाए सवाल
केवल विवादित टिप्पणी ही नहीं, डबास ने विजय शाह के पूर्व वन मंत्री कार्यकाल पर भी निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वन विभाग में अधिकारियों के तबादलों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अवैध वसूली हुई। पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल को भी भेजी गई है।
सरकार करे कठोर कार्रवाई
पूर्व सैनिक विभाग के अध्यक्ष मेजर जनरल श्याम श्रीवास्तव ने प्रदेश सरकार से मंत्री विजय शाह के विरुद्ध उचित एवं कठोर कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना किसी राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि पूरे देश की सेना है। सेना के किसी अधिकारी या जवान का अपमान देश के करोड़ों नागरिकों की भावनाओं, सैनिकों के त्याग और राष्ट्र की गरिमा का अपमान है। कर्नल सोफिया कुरैशी ने देश की सेना का प्रतिनिधित्व करते हुए अत्यंत जिम्मेदारी और गरिमा के साथ देशवासियों को सैन्य कार्रवाई की जानकारी दी थी। ऐसी अधिकारी के प्रति अपमानजनक टिप्पणी को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
