हर साल हजारों जिंदगियां निगल रहा कैंसर, 5 साल में 10.5 फीसदी मौतें
दूषित पानी, कीटनाशक और खराब लाइफस्टाइल बन रहे जानलेवा
भोपाल। प्रदेश में कैंसर एक खामोश महामारी का रूप लेता जा रहा है। राज्य में न केवल कैंसर के मरीजों की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हो रही है, बल्कि इससे होने वाली मौतों का ग्राफ भी चिंताजनक रफ्तार से ऊपर चढ़ रहा है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के आंकड़ों के मुताबिक, बीते पांच वर्षों में प्रदेश में कैंसर से होने वाली मौतों में लगभग 10.5 प्रतिशत का इजाफा हुआ है, जो राष्ट्रीय औसत (10फीसदी) से भी अधिक है। आंकड़ों के अनुसार, जहां वर्ष 2021 में प्रदेश में कैंसर से 44,056 मौतों का अनुमान था, वहीं 2025 तक यह बढ़कर 48,694 तक पहुंचने का अनुमान है। यानी महज पांच सालों में कैंसर ने 4,638 और लोगों की जान ले ली।
साल-दर-साल बढ़ रही मौतें
2021 में नए मामले सामने आए 79,871 इनमें से करीब 44,056 मौतें हुई। इसी तरह 2022 नए मामले 81,901 और मौतें 45,176 हुई। 2023 में नए मामलों का ग्राफी बढकर 84,029 हुआ, जबकि मौतें 46,341 अनुमानित रही। 2024 में नए मामले 86,124 मौतें 47,494 वहीं 2025 में नए मामले 88,297 सामने आए और 48,694 मौतें हुई।
बीमारी के फैलाव और मौतों के मुख्य कारण
आईसीएमआर के अध्ययनों के अनुसार, प्रदेश में कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी के पीछे पर्यावरण और जीवनशैली से जुड़े कई गंभीर कारण जिम्मेदार हैं। इनमें जल स्रोतों में औद्योगिक कचरा, भारी धातुएं और कीटनाशकों का घुलना रेक्टल और कोलोरेक्टल (आंतों के) कैंसर के मामलों को तेजी से बढ़ा रहा है। अस्वास्थ्यकर खानपान की आदतें और तंबाकू का अत्यधिक सेवन कैंसर के प्रमुख कारकों में शामिल हैं। बीमारी के लक्षणों का समय पर पता न चलना और इलाज में देरी होना मौतों की संख्या बढ़ने की सबसे बड़ी वजह है।
