श्रीलंकाई लायंस ने भारतीय रॉयल्स को 40 रन से हराकर जीता एशियन लीजेंड्स लीग का खिताब
लुसाका. एशियन लीजेंड्स लीग सीजन 2 के फाइनल में श्रीलंकाई लायंस ने भारतीय रॉयल्स को 40 रन से हराकर खिताब अपने नाम कर लिया. लुसाका में खेले गए हाईस्कोरिंग मुकाबले में श्रीलंकाई टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 4 विकेट पर 215 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया. जवाब में भारतीय रॉयल्स की टीम ने लक्ष्य का पीछा करने की कोशिश की, लेकिन श्रीलंकाई गेंदबाजों ने निर्णायक मौकों पर दबाव बनाए रखा और भारतीय टीम को लक्ष्य से 40 रन पहले रोक दिया.
फाइनल में श्रीलंकाई लायंस की जीत की नींव उनके बल्लेबाजों ने ही रख दी थी. टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी टीम को असिला गुणरत्ने और थिसारा परेरा ने ऐसी शुरुआत दी, जिसने मुकाबले का रुख काफी हद तक तय कर दिया. गुणरत्ने ने केवल 53 गेंदों में 98 रन की विस्फोटक पारी खेली. वह शतक से महज दो रन दूर रह गए, लेकिन उनकी पारी ने श्रीलंका के स्कोर को तेजी से आगे बढ़ाया.
गुणरत्ने के साथ थिसारा परेरा ने भी भारतीय गेंदबाजों पर जमकर प्रहार किया. परेरा ने सिर्फ 30 गेंदों में 68 रन बनाए. उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने डेथ ओवरों में श्रीलंकाई पारी को अतिरिक्त गति दी. दोनों बल्लेबाजों के प्रदर्शन का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि श्रीलंकाई टीम ने 20 ओवर में 215 रन का स्कोर खड़ा कर दिया, जो फाइनल जैसे मुकाबले में भारतीय रॉयल्स के सामने बड़ी चुनौती बन गया.
भारतीय रॉयल्स के सामने लक्ष्य 216 रन का था. टीम में पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों का अनुभव मौजूद था और ऐसे मुकाबले में उम्मीद थी कि अनुभवी बल्लेबाज बड़े लक्ष्य का पीछा करने में धैर्य और आक्रामकता का संतुलन बनाए रखेंगे. हालांकि श्रीलंकाई गेंदबाजों ने लगातार रनगति पर दबाव बनाए रखा. भारतीय बल्लेबाजों को शुरुआती ओवरों से ही अपेक्षित गति हासिल करने में परेशानी हुई और लक्ष्य का दबाव बढ़ता चला गया.
भारतीय टीम ने बीच के ओवरों में मुकाबले में वापसी की कोशिश की, लेकिन 216 रन के लक्ष्य के सामने जरूरी रनरेट लगातार बढ़ता रहा. श्रीलंकाई गेंदबाजों ने बड़े शॉट खेलने की कोशिश कर रहे बल्लेबाजों को खुलकर रन बनाने का मौका नहीं दिया. अंततः भारतीय रॉयल्स की पारी निर्धारित लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी और टीम को 40 रन से हार का सामना करना पड़ा.
इस जीत के साथ श्रीलंकाई लायंस ने सीजन 2 की ट्रॉफी अपने नाम की. टीम के लिए यह अभियान इसलिए भी खास रहा क्योंकि पूरे टूर्नामेंट में उसने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया और अंततः फाइनल में भी अपनी बल्लेबाजी की ताकत को निर्णायक साबित किया. कप्तान थिसारा परेरा ने नेतृत्व के साथ बल्लेबाजी में भी अहम योगदान दिया. फाइनल में उनकी 68 रन की पारी टीम के लिए मैच बदलने वाली पारियों में शामिल रही.
एशियन लीजेंड्स लीग का यह सीजन पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को एक बार फिर प्रतिस्पर्धी माहौल में देखने का अवसर लेकर आया. टूर्नामेंट में अलग-अलग देशों की टीमों के रूप में पूर्व स्टार खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया. श्रीलंकाई लायंस, भारतीय रॉयल्स, बांग्लादेश टाइगर्स, अफगानिस्तान पठांस, पाकिस्तान पैंथर्स और रेस्ट ऑफ एशियन स्टार्स जैसी टीमों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया.
लीग चरण के दौरान श्रीलंकाई लायंस और भारतीय रॉयल्स ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह बनाई. दोनों टीमों के बीच खिताबी मुकाबले में भी वही प्रतिस्पर्धा दिखाई दी, जिसकी उम्मीद पूर्व अंतरराष्ट्रीय सितारों से सजी प्रतियोगिता में की जा रही थी. हालांकि फाइनल में श्रीलंकाई बल्लेबाजों ने भारतीय टीम पर शुरुआती बढ़त हासिल कर ली और भारतीय रॉयल्स की ओर से लक्ष्य का पीछा करने के दौरान उस दबाव को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सका.
श्रीलंकाई टीम की जीत में फाइनल की बल्लेबाजी सबसे बड़ा अंतर साबित हुई. 215 रन के स्कोर ने भारतीय रॉयल्स को शुरुआत से ही तेजी से रन बनाने के लिए मजबूर किया. गुणरत्ने की लगभग शतकीय पारी और परेरा की तूफानी बल्लेबाजी ने भारतीय गेंदबाजी आक्रमण को दबाव में डाल दिया था. इसके बाद गेंदबाजों ने उस बढ़त को सुरक्षित रखने का काम किया.
भारतीय रॉयल्स की ओर से पूर्व भारतीय सितारों की मौजूदगी ने मुकाबले को अतिरिक्त आकर्षण दिया. टीम में नमन ओझा जैसे अनुभवी खिलाड़ी शामिल थे, लेकिन फाइनल में सामूहिक रूप से वह प्रदर्शन नहीं निकल सका जो इतने बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए जरूरी था. परिणामस्वरूप भारतीय टीम को उपविजेता के स्थान से संतोष करना पड़ा.
फाइनल में श्रीलंका की जीत ने यह भी दिखाया कि लीजेंड्स क्रिकेट में अनुभव के साथ-साथ टी-20 प्रारूप की तेजी को अपनाना कितना महत्वपूर्ण है. गुणरत्ने और परेरा ने जिस अंदाज में बल्लेबाजी की, उसने यह साबित किया कि लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ियों के पास अब भी बड़े मंच पर मैच का रुख बदलने की क्षमता मौजूद है.
सीजन 2 का समापन श्रीलंकाई लायंस के खिताब के साथ हुआ, जबकि भारतीय रॉयल्स उपविजेता रही. फाइनल में 215 रन का मजबूत स्कोर और उसके बाद 40 रन की जीत ने श्रीलंकाई टीम के पूरे अभियान को शानदार अंत दिया. गुणरत्ने शतक से भले ही दो रन दूर रह गए, लेकिन उनकी 98 रन की पारी और परेरा के 68 रन ने उन्हें खिताबी जीत का सबसे बड़ा आधार बना दिया. लुसाका में खेला गया यह मुकाबला लीजेंड्स क्रिकेट के रोमांच और पूर्व सितारों की प्रतिस्पर्धी भावना का एक और यादगार उदाहरण बन गया.
