धर्मशाला से तिब्बती युवा कांग्रेस का वैश्विक विरोध अभियान शुरू, चीन के नए कानून के खिलाफ 24 घंटे का अनशन
धर्मशाला. तिब्बती युवा कांग्रेस (टीवाईसी) ने हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से वैश्विक विरोध अभियान की शुरुआत करते हुए 24 घंटे की सांकेतिक श्रृंखलाबद्ध भूख हड़ताल शुरू की है. संगठन ने बताया कि यह अभियान तिब्बती कार्यकर्ता लोबगा रांगजेन की स्मृति को समर्पित है और चीन द्वारा लागू किए गए ‘एथनिक यूनिटी एंड प्रोग्रेस प्रमोशन लॉ’ के विरोध में आयोजित किया जा रहा है. अभियान का उद्देश्य तिब्बत में मानवाधिकारों की स्थिति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से उठाना है.
धर्मशाला स्थित त्सुगलाखांग मंदिर के निकट आयोजित इस भूख हड़ताल में तिब्बती युवा कांग्रेस के पूर्व पदाधिकारियों और कई तिब्बती कार्यकर्ताओं ने भाग लिया. संगठन के अनुसार यह विरोध प्रदर्शन केवल भारत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया के विभिन्न देशों में भी चरणबद्ध तरीके से आयोजित किया जाएगा. इसके तहत प्रदर्शन, कैंडल मार्च, जनसभाएं, जागरूकता अभियान और कूटनीतिक स्तर पर संवाद जैसे शांतिपूर्ण कार्यक्रम किए जाएंगे.
तिब्बती युवा कांग्रेस ने अपने बयान में कहा कि यह अभियान लोबगा रांगजेन के सम्मान में शुरू किया गया है, जिन्होंने 2 जुलाई को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर आत्मदाह के बाद अपनी जान गंवा दी थी. संगठन का कहना है कि उनका विरोध प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान तिब्बत के मुद्दे और वहां के मानवाधिकारों की स्थिति की ओर आकर्षित करने का प्रयास था.
संगठन ने चीन के उस कानून का भी विरोध किया, जिसे 1 जुलाई से लागू किया गया है. टीवाईसी का आरोप है कि यह कानून तिब्बती भाषा, संस्कृति, इतिहास और धार्मिक विरासत पर प्रभाव डाल सकता है. संगठन का कहना है कि किसी भी समुदाय की पहचान को कानून के माध्यम से समाप्त नहीं किया जा सकता और सांस्कृतिक विविधता का संरक्षण आवश्यक है.
तिब्बती युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद गोनपो धुंदुप ने कहा कि यह भूख हड़ताल लोबगा रांगजेन के बलिदान को श्रद्धांजलि देने और तिब्बती आंदोलन को आगे बढ़ाने का प्रयास है. उनके अनुसार यह अभियान पहले एक महीने तक धर्मशाला में चलेगा और उसके बाद दुनिया के अन्य हिस्सों में जारी रहेगा. उन्होंने बताया कि नई दिल्ली, न्यूयॉर्क सहित विभिन्न देशों में भी विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.
पूर्व उपाध्यक्ष लोबसांग त्सेरिंग ने कहा कि यह आंदोलन विशेष रूप से चीन के नए कानून के विरोध में है. उनका आरोप है कि तिब्बत में पहले से ही कई प्रतिबंध लगाए गए हैं और नया कानून नियंत्रण को और सख्त करने की दिशा में उठाया गया कदम है. उन्होंने कहा कि जहां-जहां तिब्बती युवा कांग्रेस की इकाइयां हैं, वहां यह अभियान चलाया जाएगा.
टीवाईसी के महासचिव तेनजिन लोबसांग ने कहा कि संगठन संयुक्त राष्ट्र से तिब्बती कार्यकर्ता लोबगा रांगजेन के बलिदान को औपचारिक रूप से स्वीकार करने और तिब्बत में मानवाधिकारों की स्थिति पर आवाज उठाने की मांग कर रहा है. संगठन ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तिब्बती राजनीतिक बंदियों की रिहाई, मानवाधिकारों की सुरक्षा और तिब्बत से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय पहल करने की भी अपील की है.
