राजभवन पहुंचा कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल, विजय शाह पर कार्रवाई की मांग
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने यूसीसी को बताया काला कानून
भोपाल। प्रदेश में कैबिनेट मंत्री विजय शाह और कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद को लेकर सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने लोकभवन पहुंचकर राज्यपाल मंगूभाई पटेल से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति न देने के फैसले पर पुनर्विचार करने और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
राज्यपाल से मुलाकात के बाद संवाददाताओं से चर्चा करते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह देश की बेटी और भारतीय सेना का सीधा अपमान है। इसके बावजूद सरकार इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे बैठी है।समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मुद्दे पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए सिंघार ने इसे काला कानून करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने केवल बहुमत के बल पर इसे विधानसभा में पास कराया है। सिंघार ने ऐलान किया कि 2028 में कांग्रेस की सरकार बनते ही इस कानून को समाप्त कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब देश में संविधान मौजूद है, तो अलग से ऐसे कानून की क्या आवश्यकता है?
यूसीसी आर्टिकल 29 का स्पष्ट उल्लंघन
प्रतिनिधिमंडल में शामिल कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने नेता प्रतिपक्ष के बयानों का समर्थन करते हुए कहा कि यूसीसी को लागू करना संविधान के अनुच्छेद 29 का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूसीसी लाना मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। इस प्रतिनिधिमंडल में उमंग सिंघार और आरिफ मसूद के साथ विधायक सुरेश राजे भी विशेष रूप से मौजूद रहे। राहुल गांधी के दौरे पर स्थिति स्पष्ट करते हुए उमंग सिंघार ने कहा कि इंदौर में सभा की अनुमति न मिलने के बावजूद राहुल गांधी की सभा इंदौर में ही आयोजित की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के पाले में गेंद
उल्लेखनीय है कि कैबिनेट मंत्री विजय शाह और कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद मामले में एसआईटी अपनी जांच पूरी कर सीलबंद रिपोर्ट अदालत को सौंप चुकी है, जिसमें मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की अभियोजन स्वीकृति मांगी गई थी। हालांकि, पिछले हफ्ते कैबिनेट ने राजभवन को अभियोजन की स्वीकृति न देने का प्रस्ताव भेजा था, जिसे राज्यपाल की ओर से मंजूरी दे दी गई है। अब यह पूरी रिपोर्ट और जानकारी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी, जिससे इस मामले का अंतिम फैसला अब शीर्ष अदालत के अधीन हो गया है।
