खुद के ही संकल्प को भूल गए माननीय, नहीं दे रहे संपत्ति का ब्यौरा
सचिवालय द्वारा याद दिलाने के बाद भी नहीं दिखा रहे सजगता
भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में जनता की भलाई की बातें करने वाले हमारे माननीय खुद के ही लिए संकल्पों को कितनी गंभीरता से लेते हैं, इसकी एक बानगी विधानसभा सचिवालय के दस्तावेजों में कैद है। साल 2019 में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर पक्ष-विपक्ष के सभी विधायकों ने बड़ी ही ईमानदारी और जोश के साथ एक संकल्प पारित किया था। संकल्प पारित करने के बाद माननियों ने खुद ही इसे भुला भी दिया। माननीय संकल्प के अनुसार अपनी संपत्ति का ब्यौरा देना भूल गए।
विधानसभा में पारित संकल्प था हर साल 30 जून तक खुद की और अपने परिवार की संपत्ति का हिसाब जनता के सामने रखना, लेकिन समय बीतने के साथ ही माननीय इस संकल्प को ऐसे भूल गए जैसे वह कभी था ही नहीं। आलम यह है कि खुद को जनता का सेवक बताने वाले नेताओं ने अपनी संपत्ति का सच बताने से पूरी तरह दूरी सी बना रखी है। विधानसभा सचिवालय द्वारा हर साल बकायदा पत्र लिखकर (परिपत्र जारी कर) विधायकों को उनकी जिम्मेदारी याद दिलाई जाती है, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा है।
शिवराज सरकार में हुई थी शुरुआत, 2013 के बाद टूटी परंपरा
सदन के पटल पर संपत्ति का ब्यौरा रखने की यह अच्छी शुरुआत साल 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की थी। तब मंत्रियों के लिए बजट सत्र के दौरान संपत्ति की घोषणा करना अनिवार्य करने की कोशिश हुई थी। 2011 और 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह सहित 16 मंत्रियों ने अपनी संपत्तियों का ब्यौरा सदन के पटल पर रखा। 2013 में भी मुख्यमंत्री और 16 मंत्रियों ने अपनी संपत्ति सार्वजनिक की, जिससे लगा कि यह स्वस्थ परंपरा प्रदेष की राजनीति में मिसाल बनेगी। 2015 और 2017 इसके बाद नेताओं की रुचि खत्म होने लगी। 2015 में सिर्फ तत्कालीन वित्त मंत्री जयंत मलैया और 2017 में कैबिनेट मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने ही हिम्मत दिखाई। इसके बाद किसी भी मंत्री ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा सदन में नहीं रखा।
कमलनाथ सरकार में पास हुआ था संकल्प
साल 2019 में जब कांग्रेस की कमलनाथ सरकार थी, तब शीतकालीन सत्र में इसे लेकर एक नया और कड़ा संकल्प पारित किया गया। तत्कालीन संसदीय कार्यमंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने इस संकल्प को सदन में प्रस्तुत करते हुए कहा था कि प्रदेश के सभी विधायकों को हर साल 30 मार्च तक की स्थिति में अपनी और अपने आश्रितों (परिवार) की संपत्ति का विवरण 30 जून से पहले विधानसभा प्रमुख सचिव को सौंपना होगा। मकसद था पारदर्शिता योजना यह थी कि इस ब्यौरे को विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा, ताकि सूबे की जनता अपने जनप्रतिनिधियों की आर्थिक तरक्की को लाइव देख सके। सरकार बदली, संकल्प रह गया, लेकिन विधायकों की इच्छा शक्ति गायब हो गई।
