चुंगी क्षतिपूर्ति से वसूले जाएंगे बिजली बिल के बकाया 104 करोड़
कंपनियों द्वारा दिए नोटिस के बाद अब नगरीय विकास विभाग राज्य स्तर पर करेगा राशि का समायोजन
भोपाल। प्रदेश के नगरीय निकायों द्वारा बिजली बिलों का भुगतान न करना अब उनके बजट पर भारी पड़ने जा रहा है। प्रदेश के 33 नगरीय निकायों ने तीनों सरकारी बिजली कंपनियों का कुल 104 करोड़ 29 लाख रुपए का बिल दबाकर रखा है। कंपनियों द्वारा सख्त रुख अपनाते हुए जब इन निकायों को नोटिस थमाए गए, तो शासन स्तर पर हड़कंप मच गया। अब इस भारी-भरकम बकाया राशि की वसूली के लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने बीच का रास्ता निकालते हुए निकायों को मिलने वाली चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि से इसे समायोजित ( करने का फैसला किया है।
प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनियों का करोड़ों रुपया इन निकायों पर बकाया है। जानकारी के अनुसार मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (भोपाल) के अंतर्गत 100 निकायों पर39 करोड़ 58 लाख 44 हजार, पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (जबलपुर) के अंतर्गत 134 निकायों पर 37 करोड़ 68 लाख 95 हजार रूपए और पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (इंदौर)के अंतर्गत 100 निकायों पर27 करोड़ 1 लाख 61 हजार रूपए इस तरह कुल 334 पर कंपनियों का 104 करोड़ 29 लाख रूपए बाकी है।
विभाग ने जारी किए निर्देश
बिजली कंपनियों के द्वारा दिए गए नोटिस के बाद अब नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने साफ कर दिया है कि चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि से ही इस 104 करोड़ 29 लाख रुपए का समायोजन किया जाएगा। विभाग ने बिजली कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि वे इस राशि का समायोजन कर संबंधित निकायों को इसकी सूचना दें, साथ ही इसकी रिपोर्ट संचालनालय को भी सौंपे।
विकास कार्यों पर पड़ सकता है असर
नगरीय विकास एवं आवास विभाग के इस कदम से बिजली कंपनियों को तो राहत मिलेगी, उन्हें उनका बकाया बिजली बिल की राषि मिल जाएगी, लेकिन निकायों के बजट में कटौती होने से डिफाल्टर निकायों के स्थानीय विकास कार्यों पर इसका असर पड़ सकता है।
