पुराने वाहनों का माइलेज घटा, मेंटेनेंस का बढ़ा खर्च
जेब पर भारी पड़ रहा ई-20 पेट्रोल, तकनीकी खराबी से वाहन मालिक परेशान
भोपाल। देश में प्रदूषण कम करने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने के उद्देश्य से सरकार ई-20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल को तेजी से बढ़ावा दे रही है। अप्रैल 2025 से बाजार में आने वाले सभी नए दोपहिया और चारपहिया वाहनों को ई-20 ईंधन के अनुकूल (कंप्लायंट) बनाकर ही उतारा जा रहा है। लेकिन, इस बदलाव ने अप्रैल 2025 से पहले खरीदे गए लाखों पुराने वाहन मालिकों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि उनके वाहन इस नए ईंधन के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं।
राजधानी भोपाल सहित कई प्रमुख शहरों के वाहन मालिकों का कहना है कि ई-20 पेट्रोल का इस्तेमाल करने के बाद से उनकी गाड़ियों के माइलेज में 3 से 7 प्रतिशत तक की कमी आई है। इसके अलावा, कई चालकों ने इंजन की परफॉर्मेंस (पिकअप) कमजोर होने और ईंधन की खपत अचानक बढ़ जाने की भी शिकायतें दर्ज कराई हैं। इस मामले में ऑटो मैकेनिकों का कहना है कि पुराने वाहनों में ईंधन से जुड़े पुर्जों की खराबी पहले के मुकाबले काफी बढ़ गई है। ई-20 पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ियों में मुख्य रूप से जो समस्याएं सामने आ रही है, उनमें फ्यूल पंप और इंजेक्टर का जल्दी चोक (जाम) होना, फ्यूल फिल्टर और फ्यूल पाइप में खराबी और इंजन के भीतर लगे रबर के पार्ट्स का गलना हैं। इन तकनीकी दिक्कतों के कारण वाहन मालिकों की जेब पर मेंटेनेंस (मरम्मत) का अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
अप्रैल 2025 से पहले निर्मित अधिकांश वाहन ई-20 ईंधन को ध्यान में रखकर डिजाइन नहीं किए गए थे। पुराने वाहनों में लंबे समय तक इस ईंधन का उपयोग करने से इंजन और फ्यूल सिस्टम के पुर्जों को नुकसान पहुंच सकता है। सरकार को पुराने वाहनों के लिए जल्द से जल्द स्पष्ट तकनीकी गाइडलाइंस जारी करनी चाहिए और कोई व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए।
लक्ष्य बड़ा, पर राह में चुनौतियां
सरकार की ई-20 योजना का उद्देश्य बेहद सकारात्मक है। इससे न सिर्फ प्रदूषण में कमी आएगी और किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि पेट्रोल पर देश की निर्भरता भी घटेगी। हालांकि, जब तक पुराने वाहनों के लिए कोई ठोस व्यवस्था या वैकल्पिक ईंधन (जैसे सामान्य पेट्रोल) का विकल्प सुचारू रूप से नहीं मिलता, तब तक करोड़ों वाहन मालिकों के लिए घटता माइलेज और बढ़ता खर्च एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।
