दिव्यांग कर्मचारियों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन पर रोक
भोपाल। प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में कार्यरत दिव्यांग कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है। सामाजिक न्याय विभाग ने प्रदेश के सभी दिव्यांग शासकीय सेवकों के दिव्यांगता प्रमाण पत्रों के सामान्य या सामूहिक (ब्लैंकेट) स्तर पर पुनः सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा इस प्रक्रिया पर कड़ी नाराजगी जताए जाने के बाद राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है।
विभाग द्वारा जारी निर्देशों के तहत अब सभी विभागों के विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों, कलेक्टरों, जिला पंचायत सीईओ और राजस्व मंडल के अध्यक्ष को स्पष्ट किया गया है कि दिव्यांगता प्रमाण पत्रों का पुनः सत्यापन केवल संदिग्ध या बेहद जरूरी प्रकरणों में ही किया जाए। सभी कर्मचारियों का सामान्य रूप से पुनः परीक्षण करना किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का मानना है कि व्यापक पैमाने पर री-वेरिफिकेशन करने से वास्तविक और पात्र दिव्यांग कर्मचारियों को अनावश्यक मानसिक कष्ट, असुविधा और प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जो उनके मानवाधिकारों और गरिमा के खिलाफ है। विभाग ने साफ किया है कि यदि किसी मामले में फर्जी प्रमाण पत्र की आशंका या शिकायत होती है, तो उसमें आरपीडब्ल्यूडी एक्ट के कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत ही पुनः परीक्षण और आगामी कार्रवाई की जाएगी।
