तमिलनाडु में एआईएडीएमके में बगावत, विजय सरकार को समर्थन देने वाले 25 विधायक पदों से हटाए गए
चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में बुधवार को उस समय बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया जब एआईएडीएमके प्रमुख Edappadi K. Palaniswami ने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर अभिनेता से नेता बने C Joseph Vijay की सरकार के समर्थन में वोट करने वाले 25 नेताओं और विधायकों को पार्टी पदों से हटा दिया। इस कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और एआईएडीएमके के भीतर गहराती अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। पार्टी से हटाए गए नेताओं में वरिष्ठ नेता एसपी वेलुमणि और सी वी षण्मुगम जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। माना जा रहा है कि यह कार्रवाई तमिलनाडु विधानसभा में हुए विश्वास मत के दौरान पार्टी के निर्देश की खुली अवहेलना करने के कारण की गई है।
तमिलनाडु विधानसभा में बुधवार को नई सरकार के गठन के बाद विश्वास मत प्रस्ताव पर मतदान हुआ। हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम यानी TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत के लिए आवश्यक आंकड़े से कुछ सीटें कम होने के कारण सरकार गठन को लेकर असमंजस बना हुआ था। कांग्रेस के समर्थन के बावजूद पार्टी को पूर्ण बहुमत का भरोसा नहीं था। ऐसे में एआईएडीएमके के 25 बागी विधायकों का समर्थन विजय सरकार के लिए निर्णायक साबित हुआ।
विश्वास मत के दौरान टीवीके सरकार को कुल 144 वोट मिले जबकि विरोध में 22 वोट पड़े। विरोध में वोट देने वाले विधायक एआईएडीएमके के आधिकारिक गुट के थे, जबकि पार्टी के 25 बागी विधायकों ने सरकार के पक्ष में मतदान किया। इस घटनाक्रम ने एआईएडीएमके नेतृत्व को बड़ा झटका दिया क्योंकि पार्टी नेतृत्व ने अपने सभी विधायकों को सरकार के खिलाफ मतदान करने का निर्देश दिया था। लेकिन कई नेताओं ने खुलकर पार्टी आदेश की अवहेलना की और विजय सरकार को समर्थन दिया।
सूत्रों के अनुसार एआईएडीएमके प्रमुख पलानीस्वामी पहले से ही पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी और असंतोष से परेशान थे। विश्वास मत से पहले भी संकेत मिल रहे थे कि पार्टी के कुछ विधायक और जिला स्तर के नेता टीवीके के साथ जाने के पक्ष में हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व को उम्मीद थी कि अंतिम समय तक सभी विधायक व्हिप का पालन करेंगे, लेकिन मतदान के दौरान स्थिति पूरी तरह बदल गई। जैसे ही यह स्पष्ट हुआ कि 25 विधायक पार्टी लाइन से अलग होकर सरकार के समर्थन में वोट कर चुके हैं, उसके तुरंत बाद कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई।
बुधवार शाम पार्टी की ओर से जारी आदेश में इन सभी नेताओं को उनके संगठनात्मक पदों से हटाने की घोषणा कर दी गई। पलानीस्वामी ने हटाए गए नेताओं की जगह नए जिला सचिवों और पदाधिकारियों की नियुक्ति भी कर दी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पार्टी के भीतर अनुशासन बनाए रखने और बाकी विधायकों को सख्त संदेश देने के उद्देश्य से उठाया गया है। हालांकि इस कार्रवाई से पार्टी के भीतर और ज्यादा विभाजन की आशंका भी बढ़ गई है।
विश्वास मत के दौरान विधानसभा में काफी हंगामे की स्थिति भी देखने को मिली। विपक्षी दल डीएमके के विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। डीएमके ने आरोप लगाया कि राज्य की राजनीति में अस्थिरता पैदा की जा रही है और विधायकों की खरीद-फरोख्त हुई है। हालांकि इन आरोपों को टीवीके प्रमुख विजय ने खारिज कर दिया। विजय ने कहा कि उनकी सरकार को मिला समर्थन लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है और किसी प्रकार का दबाव या सौदेबाजी नहीं हुई है।
तमिलनाडु की राजनीति में विजय का तेजी से उभरना पहले ही बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा था। फिल्मी दुनिया के लोकप्रिय अभिनेता विजय ने राजनीति में आने के बाद बहुत कम समय में बड़ी जनसमर्थन हासिल कर लिया। हालिया विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी टीवीके ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया। हालांकि पूर्ण बहुमत न मिलने के कारण सरकार गठन की प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण बनी हुई थी। ऐसे में एआईएडीएमके के भीतर हुई बगावत ने विजय सरकार के लिए रास्ता आसान कर दिया।
राजनीतिक हलकों में अब इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि एआईएडीएमके के भीतर असंतोष लंबे समय से पनप रहा था। पार्टी के कुछ नेताओं को लग रहा था कि पलानीस्वामी का नेतृत्व लगातार कमजोर हो रहा है और पार्टी जनाधार खो रही है। इसी कारण कई विधायक और नेता नए राजनीतिक समीकरणों की तलाश में थे। माना जा रहा है कि विजय की बढ़ती लोकप्रियता और नई राजनीतिक संभावनाओं को देखते हुए कुछ नेताओं ने भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखकर यह कदम उठाया।
पार्टी से हटाए गए नेताओं की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि कई बागी विधायक आगे भी विजय सरकार के साथ बने रह सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो एआईएडीएमके में बड़ा विभाजन देखने को मिल सकता है। वहीं कुछ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में और विधायक भी पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुलकर सामने आ सकते हैं।
इधर विजय सरकार के लिए यह विश्वास मत बड़ी राहत लेकर आया है। सरकार बनने के बाद यह पहला बड़ा परीक्षण था और उसमें सफलता मिलने से टीवीके खेमे में उत्साह का माहौल है। विजय ने विश्वास मत जीतने के बाद कहा कि उनकी सरकार तमिलनाडु के विकास, युवाओं के रोजगार और पारदर्शी प्रशासन पर ध्यान देगी। उन्होंने सभी समर्थक विधायकों का आभार जताया और कहा कि जनता ने बदलाव के लिए वोट दिया है।
तमिलनाडु की राजनीति में इस घटनाक्रम को आने वाले समय के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ विजय की पार्टी तेजी से मजबूत होती दिखाई दे रही है तो दूसरी ओर एआईएडीएमके के भीतर नेतृत्व संकट और गहराता नजर आ रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि पार्टी के भीतर जारी असंतोष को समय रहते नहीं संभाला गया तो आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल पूरे तमिलनाडु की नजर अब इस बात पर टिकी है कि एआईएडीएमके के बागी विधायक आगे क्या रुख अपनाते हैं और विजय सरकार अपनी नई राजनीतिक ताकत को किस तरह स्थिरता में बदलती है।
