वन्य-जीवों की अवैध बिक्री की तो होगी सात साल की जेल
313 दुर्लभ कछुओं की बरामदगी के बाद एडवाइजरी जारी
भोपाल। प्रदेश वन विभाग ने वन्य-जीव (संरक्षण) अधिनियम-1972 के तहत प्रतिबंधित जीवों की अवैध खरीद-फरोख्त और उन्हें पालने वालों के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। हाल ही में फरवरी 2026 में स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में 313 जीवित कछुओं की बरामदगी और एक बड़े गिरोह के खुलासे के बाद विभाग ने प्रदेश भर के लिए नई गाइडलाइन जारी की है।
वन विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई पेट शॉप और एक्वेरियम संचालक चोरी-छिपे प्रतिबंधित कछुओं, पक्षियों और अन्य वन्य-जीवों की बिक्री कर रहे हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अनुसूचीबद्ध जीवों का शिकार, परिवहन या उन्हें घर में पालना दंडनीय अपराध है। व्यापार के लिए सक्षम प्राधिकारी की अनुमति अनिवार्य है। दुकानदारों को अपने स्टॉक से संबंधित सभी वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। सोशल मीडिया या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी प्रतिबंधित जीवों का प्रचार या बिक्री करना कानूनन जुर्म है।
टोल-फ्री नंबर पर कर सकेंगे शिकायत
अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य-जीव) एल. कृष्णामूर्ति’’ ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे किसी भी प्रतिबंधित जीव को न खरीदें और न ही उन्हें घरों में कैद रखें। वन्य-जीवों की सुरक्षा के लिए जनता से सहयोग मांगते हुए विभाग ने एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। टोल-फ्री नंबर 0755-2524000 पर इसकी शिकायत की जा सकेगी। नियमों का उल्लंघन करने पर 7 वर्ष तक का कारावास और भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
