कमलनाथ ने बढ़ाई सक्रियता, कांग्रेस में हलचल
पीसीसी में बैठेंगे समर्थक, जिलों का भी करेंगे दौरा
भोपाल। प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट बढ़ती नजर आ रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपनी सियासी सक्रियता का संकेत देते हुए अपने निवास पर अपने समर्थक नेताओं, पूर्व मंत्रियों और विधायकों की अहम बैठक बुलाई। इस बैठक के बाद कांग्रेस खेमे में हलचल तेज हो गई है और सत्तारूढ़ भाजपा को घेरने की रणनीति पर काम शुरू हो गया है।
बैठक में कमलनाथ ने साफ संकेत दिए कि अब समय आ गया है जब कांग्रेस को जनता के मुद्दों पर सड़कों पर उतरना होगा। सूत्रों की मानें तो आगामी दिनों में कमलनाथ समर्थक खुद जिलों का दौरा करेंगे और प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में नियमित रूप से उपस्थित रहकर कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेंगे। मुलाकात के दौरान प्रदेश में हाल ही में हुई कफ सिरप से बच्चों की मौत और भोपाल पुलिस कस्टडी में युवक की मौत जैसे संवेदनशील मामलों को लेकर कांग्रेस की ओर से आक्रामक रुख अपनाने का निर्णय लिया गया। कमलनाथ ने स्पष्ट कहा कि भाजपा सरकार की विफलताओं को अब और नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
ये नेता रहे बैठक में मौजूद
बैठक में कमलनाथ के साथ सज्जन सिंह वर्मा, तरुण भनोत, सुखदेव पांसे, लखन घनघोरिया, संजय शर्मा, रवि जोशी और राजकुमार खुराना जैसे कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। सभी ने कांग्रेस की रणनीति को जमीनी स्तर पर उतारने का संकल्प दोहराया।
उज्जैन कांग्रेस में बढ़ी गुटबाजी
प्रदेश कांग्रेस में संगठन सृजन के तहत शहर और जिला अध्यक्षों की नियुक्तियों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। उज्जैन कांग्रेस दो गुटों में बंट गई है। विरोध कर रहे गुट के नेता राजधानी भोपाल पहुंचे और वरिष्ठ नेता अजय सिंह से मुलाकात की। इन नेताओं में चेतन यादव, माया त्रिवेदी, हेमंत चौहान, मुरली पोरवाल, दीपक मेहरे, गब्बर कुंवावल, रवि शुक्ला, रमेश परिहार, मुजीब, श्रवण शर्मा और राजेश त्रिवेदी शामिल हैं। इन सभी को कांग्रेस ने अनुशासनहीनता के आरोप में नोटिस जारी किया है। आरोप है कि ये नेता उज्जैन में समानांतर कांग्रेस चला रहे हैं। विरोधी गुट ने शहर और जिलाध्यक्षों की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अजय सिंह के समक्ष अपनी बात रखी।
नोटिस नहीं देना चाहिए
पूर्व नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह ने कांग्रेस पार्टी में नोटिस प्रथा को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी एक बड़ी संस्था है और नेताओं कार्यकर्ताओं को छोटी-छोटी बातों पर नोटिस नहीं देना चाहिए। उनका स्पष्ट संदेश था कि पार्टी अभी संघर्ष के दौर में है, इसलिए नोटिस प्रथा बंद होनी चाहिए। घर में चार बर्तन हैं तो खटकते हैं डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि कांग्रेस में खुलकर बात होनी चाहिए और अनुशासन के नाम पर पार्टी कार्यकर्ताओं को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने जीतू पटवारी से बातचीत की है।
