कफ सिरप की बिक्री पर सख्ती, तय की मासिक सीमा
रिटेलर 50 और होलसेलर्स बेच सकेंगे एक हजार बोतल
भोपाल। छिंदवाड़ा, बैतूल और पांढुर्णा में जहरीली दवाई के कारण मासूम बच्चों की मौत के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने कफ सिरप की अनियंत्रित बिक्री पर सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में कड़ा कदम उठाते हुए होलसेलर्स और रिटेलर्स के लिए कफ सिरप की मासिक बिक्री की सीमा निर्धारित कर दी है।
जारी निर्देशों के अनुसार, अब होलसेल विक्रेता प्रतिमाह अधिकतम 1000 बोतल और रिटेल विक्रेता 50 बोतल तक ही कफ सिरप की बिक्री कर सकेंगे। विभाग का मानना है कि इस कदम से अमानक और दूषित दवाओं की बिक्री पर रोक लगेगी और संभावित नुकसान से बचा जा सकेगा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा दूषित कफ सिरप के बढ़ते मामलों को गंभीरता से लेते हुए पूरे प्रदेश में कार्रवाई तेज कर दी गई है। अब तक 243 सैंपल लिए जा चुके हैं, जिनमें कोल्ड्रिफ, रेस्पीफ्रेश जे.टी., और रिलाइफ सिरप जैसे नामचीन ब्रांड अमानक पाए गए हैं। विभाग ने अब तक 1086 बोतलें जब्त कर सील कर दी हैं।
टेस्टिंग अनिवार्य करने की मांग
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में फिलहाल ओरल लिक्विड सिरप की नियमित टेस्टिंग अनिवार्य नहीं है। इसको लेकर राज्य के ड्रग कंट्रोलर दिनेश श्रीवास्तव ने केंद्रीय ड्रग कंट्रोलर को पत्र लिखकर ओरल लिक्विड सिरप की टेस्टिंग को अनिवार्य किए जाने की मांग की है।
