कमजोर हड्डी, डायबिटीज़ के मरीजों का कम दर्द में होगा इलाज
भारत सरकार ने नए डेंटल इम्प्लांट को प्रदान किया पेटेंट
भोपाल। एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने डेंटल चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है। डायबिटीज़ और कमजोर हड्डी की समस्या से पीड़ित मरीजों के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए एक नए डेंटल इम्प्लांट को भारत सरकार ने पेटेंट प्रदान किया है। इस इम्प्लांट का डिजाइन न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से अनूठा है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल के तहत विकसित किया गया है।
इस अभिनव तकनीक को एम्स भोपाल के मैक्सिलोफेशियल सर्जन डॉ. अंशुल राय ने तैयार किया है। उन्होंने बताया कि यह नया इम्प्लांट पारंपरिक इम्प्लांट की तुलना में कम ड्रिलिंग, कम दर्द और दवाओं की न्यूनतम आवश्यकता को सुनिश्चित करता है। इसकी खास बात यह है कि इसमें उपयोग की गई ऑस्टियोब्लास्ट कोशिकाएं हड्डी से गहराई तक जुड़ जाती हैं, जिससे इम्प्लांट अधिक मजबूत और टिकाऊ बनता है। डॉ. राय के अनुसार, अब डायबिटीज़ और कमजोर हड्डी वाले मरीज भी डेंचर लगवा सकेंगे, जो पहले एक चुनौती माना जाता था। इस इम्प्लांट के माध्यम से ऐसे मरीजों को भी स्थायी समाधान मिल सकेगा।
एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ डॉ. माधवानंद कर ने कहा कि भारत सरकार के सहयोग से इस नवाचार को जल्द ही व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन के लिए तैयार किया जाएगा, जिससे देश के आम नागरिकों को सस्ते और आधुनिक डेंटल इम्प्लांट की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
