एच-1बी वीज़ा शुल्क पर अमेरिकी स्पष्टीकरण से भारतीय टेक पेशेवरों की चिंताएं घटीं, नासकॉम ने कहा उद्योग पर सीमित असर
नई दिल्ली. भारतीय आईटी उद्योग निकाय नासकॉम ने सोमवार को कहा कि अमेरिकी प्रशासन की ओर से एच-1बी वीज़ा शुल्क वृद्धि को लेकर दिए गए हालिया स्पष्टीकरण ने भारतीय तकनीकी पेशेवरों और कंपनियों की तत्काल चिंताओं को कम कर दिया है. नासकॉम के अनुसार इस स्पष्टीकरण के बाद व्यापारिक अनिश्चितता और निरंतरता को लेकर बनी आशंकाओं को काफी हद तक दूर कर दिया गया है.
दरअसल, सप्ताहांत में अमेरिकी प्रशासन ने यह स्पष्ट किया कि बढ़ा हुआ शुल्क मौजूदा एच-1बी वीज़ा धारकों पर लागू नहीं होगा और यह केवल नए आवेदनों पर एक बार लागू किया जाएगा. साथ ही यह शुल्क वृद्धि वर्ष 2026 से लागू होगी. इससे कंपनियों को पर्याप्त समय मिल गया है ताकि वे अमेरिका में स्थानीय भर्ती और स्किलिंग कार्यक्रमों पर और अधिक जोर दे सकें.
नासकॉम ने कहा कि उद्योग अमेरिका में स्थानीय प्रतिभा को प्रशिक्षित करने और भर्ती पर पहले से ही एक अरब डॉलर से अधिक खर्च कर रहा है और स्थानीय नियुक्तियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. आंकड़ों के अनुसार अग्रणी भारतीय और भारत-केंद्रित कंपनियों को मिलने वाले एच-1बी वीज़ा की संख्या वर्ष 2015 में 14,792 थी, जो 2024 में घटकर 10,162 रह गई है.
नासकॉम का कहना है कि शीर्ष दस भारतीय और भारत-केंद्रित आईटी कंपनियों में कार्यरत एच-1बी वीज़ा धारकों की हिस्सेदारी उनके कुल कर्मचारियों का एक प्रतिशत से भी कम है. “यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि इस बढ़ोतरी का क्षेत्र पर बहुत ही सीमित असर होगा,” संगठन ने कहा. नासकॉम ने यह भी रेखांकित किया कि अमेरिकी कार्यबल की तुलना में एच-1बी पेशेवरों की संख्या मात्र दशमलव बिंदु के बराबर है.
नासकॉम ने दोहराया कि उसने हमेशा एक स्थिर और पूर्वानुमेय स्किल्ड टैलेंट मोबिलिटी ढांचे की वकालत की है. ऐसे ढांचे न केवल किसी देश की प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं बल्कि उन्होंने लंबे समय से अमेरिकी नवाचार और आर्थिक वृद्धि को गति दी है. बयान में कहा गया कि “कुशल प्रतिभा की गतिशीलता ही भविष्य के निवेश निर्णयों को सक्षम करेगी, शोध को गति देगी और वैश्विक नवाचार अर्थव्यवस्था में देशों की स्थिति को सशक्त बनाएगी.”
हालांकि, उद्योग विशेषज्ञों की राय मिश्रित रही. कुछ का मानना है कि अगले छह से बारह महीनों में कोई नकारात्मक असर देखने को नहीं मिलेगा, क्योंकि शुल्क वृद्धि आगामी आवेदन चक्र से ही प्रभावी होगी. वहीं कुछ ने आगाह किया कि फिलहाल भले ही तत्काल दबाव टल गया हो, लेकिन दीर्घकाल में इस नियम के स्थायी बने रहने पर आईटी कंपनियों को अपनी कारोबारी रणनीतियों का पुनर्मूल्यांकन करना पड़ सकता है.
एच-1बी वीज़ा का सबसे बड़ा लाभार्थी भारतीय तकनीकी पेशेवर हैं, जो कुल आवेदकों में 70 प्रतिशत से अधिक हैं. अमेरिका की नागरिकता एवं आप्रवासन सेवा (यूएससीआईएस) की वेबसाइट के अनुसार वित्त वर्ष 2025 तक के आंकड़ों में अमेज़न 10,044 अनुमोदनों के साथ शीर्ष पर है. इसके बाद टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (5,505), माइक्रोसॉफ्ट कॉर्प (5,189), मेटा (5,123), एप्पल (4,202), गूगल (4,181), कॉग्निजेंट (2,493), जेपी मॉर्गन चेस (2,440), वॉलमार्ट (2,390) और डेलॉइट कंसल्टिंग (2,353) शामिल हैं. शीर्ष 20 कंपनियों में इंफोसिस (2,004), एलटीआई माईंडट्री (1,807) और एचसीएल अमेरिका (1,728) भी शामिल हैं.
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार हर साल कांग्रेस द्वारा अनिवार्य कोटे के तहत 65,000 एच-1बी वीज़ा जारी किए जाते हैं, जबकि अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वालों के लिए अतिरिक्त 20,000 वीज़ा आरक्षित रहते हैं.
नासकॉम ने कहा कि यह राहत उद्योग को अमेरिका में अपनी दीर्घकालिक रणनीतियों पर काम करने का समय देगी. कंपनियां स्थानीय स्तर पर स्किलिंग और भर्ती को प्राथमिकता देकर भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होंगी. हालांकि यह स्पष्ट है कि भारतीय पेशेवरों की भूमिका अमेरिकी तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र में अहम बनी रहेगी, और उद्योग अब वीज़ा निर्भरता को धीरे-धीरे कम करने के रास्ते पर है.
