प्रदेश में 2 से 17 फीसदी लोगों में मुंह के कैंसर के लक्षण
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चालीस से सत्तर फीसदी लोग कैविटी की समस्या से हैं परेशानभोपाल। एम्स भोपाल द्वारा किए गए राज्यव्यापी मौखिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सर्वे में शामिल प्रदेश के 41 जिलों के शहरी और ग्रामीण इलाकों के करीब 48 हजार लोगों की जांच की गई, जिसमें बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के विभिन्न आयु वर्ग को शामिल किया गया। इस व्यापक सर्वे के नतीजे चिंताजनक हैं।एम्स भोपाल के दंत विभाग की टीम और रीजनल ट्रेनिंग सेंटर फॉर ओरल हेल्थ प्रमोशन एंड डेंटल पब्लिक हेल्थ के नोडल अधिकारी डॉ. अभिनव सिंह ने स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय के सहयोग से, यह राज्यव्यापी अध्ययन किया। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार राज्य में 40 से 70 फीसदी लोग दांतों में कीड़े (कैविटी) की समस्या से जूझ रहे हैं। वहीं 50 से 87 फीसदी लोग मसूड़ों की बीमारियों से प्रभावित हैं। इसके अलावा 2 से 17 फीसदी लोगों में मुंह के कैंसर से पहले की अवस्थाएं पाई गई हैं। विशेष रूप से चिंताजनक तथ्य यह है कि 70 फीसदी से अधिक बुजुर्ग और लगभग आधे 5 वर्षीय बच्चे दांतों की सड़न से प्रभावित पाए गए हैं। यह राज्य में मौखिक स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।शिक्षकों, काउंसलर्स को दे रहे प्रशिक्षणसर्वेक्षण को पारदर्शी और वैज्ञानिक बनाने के लिए मोबाइल एप्लीकेशन और जीपीएस आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इस पहल से अब मौखिक स्वास्थ्य की वास्तविक तस्वीर सामने आ गई है, जिससे जनजागरूकता, रोकथाम, और उपचार से जुड़ी योजनाओं को बेहतर ढंग से जनता तक पहुँचाया जा सकेगा। इसके अलावा, एम्स भोपाल में स्थापित रीजनल ट्रेनिंग सेंटर के माध्यम से डॉक्टरों, शिक्षकों और काउंसलर्स को मौखिक स्वास्थ्य संबंधी प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि रोग की रोकथाम और उपचार के लाभ सीधे समाज तक पहुँच सकें।क्या होता है मौखिक स्वास्थ्यमौखिक स्वास्थ्य से तात्पर्य दांतों, मसूड़ों और संपूर्ण मुख-चेहरे तंत्र के स्वास्थ्य से है। कई बच्चे और वयस्क सामान्य मौखिक रोगों, जैसे कि कैविटी (दांतों की सड़न) और पेरिओडोंटल (मसूड़ों) रोग के कारण खराब मौखिक स्वास्थ्य का अनुभव करते हैं, ये दोनों ही दांतों के झड़ने के प्रमुख कारण हैं।
