कुपोषित बच्चों के पोशण से ज़्यादा खर्च हो रहा गाय के चारे पर
गाय पर 40, कुपोषित बच्चों पर सरकार खर्च कर रही 8 से 12 रूपए
भोपाल। प्रदेश में कुपोषण को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठने लगे हैं। सरकार के द्वारा हाल में विधानसभा में दिए आंकड़े चौंकाने वाले हैं। आंकड़ों के अनुसार कुपोशित बच्चों पर सरकार द्वारा प्रतिदिन किया जाने वाला खर्च गाय के चारे पर किए जा रहे खर्च से ज्यादा है।
महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने बताया कि प्रदेश सरकार गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के पोषण पर महज 12 प्रतिदिन, जबकि सामान्य कुपोषित बच्चों पर 8 प्रतिदिन खर्च किया जा रहा है। दूसरी ओर, गायों के आहार के लिए 40 प्रतिदिन खर्च किए जा रहे हैं। यह अंतर अब विपक्ष के निशाने पर है। कांग्रेस ने सरकार से तीखे सवाल उठाए हैं। वहीं सरकार का दावा है कि वह स्थिति सुधारने के लिए प्रयास कर रही है, लेकिन जब तक बच्चों के पोषण से ज्यादा बजट गायों के चारे पर खर्च होता रहेगा, तब तक ’कुपोषण मिटाने का सपना अधूरा ही रहेगा।
सरकार ने भी माना बजट कम है
महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि यह बजट पर्याप्त नहीं है और केंद्र सरकार से फंड बढ़ाने की मांग की गई है, लेकिन कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर ही सवाल उठा दिए। कांग्रेस का कहना है कि कुपोषण के गंभीर हालात के बावजूद सरकार गौशालाओं को वरीयता दे रही है।
आदिवासी अंचल में भयावह स्थिति
राज्य के श्योपुर, धार, खरगोन, बड़वानी, छिंदवाड़ा और बालाघाट जैसे आदिवासी बहुल जिलों में हालात बेहद चिंताजनक हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार कई जिलों में हर चार में से एक बच्चा गंभीर रूप से कुपोषित है।
ये है प्रदेश में कुपोषण की तस्वीर
राज्य में कुल कुपोषित बच्चों की संख्या 1.36 लाख है। वहीं गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की संख्या 29 हजार 830 है। जबकि मध्यम रूप से कुपोषित बच्चों की संख्या 1.06 लाख है। प्रदेश की राष्ट्रीय औसत कुपोषण दर’ 5.40 प्रतिशत है।
