निर्मला सप्रे को लेकर मचा सियासी घमासान, कांग्रेस ने मांगा इस्तीफा
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कांग्रेस के साथ भाजपा भी अब बना रही दूरी
भोपाल। बीना से विधायक निर्मला सप्रे एक बार फिर से सियासी हलचल का केंद्र बन गई हैं। कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीतने के बाद भाजपा में शामिल हुईं निर्मला सप्रे ने अब तक विधायक पद से इस्तीफा नहीं दिया है और इसी बीच उनका नाम भाजपा की मंडल कार्यसमिति में शामिल होने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इसके बाद एक बार फिर कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष से मांग की है कि निर्मला सप्रे की सदस्यता समाप्त की जाए। हालात ऐसे बन गए हैं कि निर्मला सप्रे को ना तो कांग्रेस स्वीकार कर पा रही है और ना ही भाजपा उन्हें अपना रही है।
दरअसल हाल ही में भाजपा के सागर जिला अध्यक्ष श्याम तिवारी द्वारा जारी मंडल कार्यसमितियों की सूची में बीना नगर मंडल में विधायक निर्मला सप्रे को “स्थायी आमंत्रित सदस्य“ के रूप में शामिल किया गया था। यह सूची सामने आते ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई। कांग्रेस ने इस पर कड़ा एतराज जताया और विधायक पद से इस्तीफे की मांग की। हालांकि, कुछ ही घंटों में भाजपा ने इस सूची को एक “टाइपिंग मिस्टेक“ बताते हुए संशोधित सूची जारी की, जिसमें निर्मला सप्रे का नाम हटा दिया गया। सागर भाजपा अध्यक्ष श्याम तिवारी ने स्पष्ट किया कि पहली सूची गलती से जारी हो गई थी और अब सही सूची प्रकाशित कर दी गई है। भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी ने भी कहा कि यह केवल टाइपिस्ट की त्रुटि थी।
कांग्रेस ने भाजपा की इस सफाई को खारिज करते हुए सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि क्या भाजपा में टाइपिंग मिस्टेक से ही टिकट का बंटवारा होता है? विधानसभा अध्यक्ष को चाहिए कि निर्मला सप्रे की सदस्यता रद्द करें और बीना में उपचुनाव करवाएं। विवाद के चलते राज्य की सियासत गरमाई हुई है और यह देखना दिलचस्प होगा कि विधानसभा अध्यक्ष इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं। फिलहाल कांग्रेस भाजपा पर हमला तेज कर चुकी है, वहीं भाजपा पूरे मामले को प्रशासनिक भूल बताकर टालने की कोशिश कर रही है। दरअसल लोकसभा चुनाव के दौरान चुनावी मंच पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के सामने भाजपा का गमछा पहन कर भाजपा में आने का ऐलान करने वाली सागर जिले की कांग्रेस से जीती एकमात्र बीना विधायक निर्मला सप्रे ने अभी तक अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है।
भाजपा स्पष्ट करे, निर्मला को स्वीकार किया या नहीं
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बयान देते हुए कहा कि भाजपा स्पश्ट करें की उन्होंने निर्मला सप्रे को स्वीकार किया है या नहीं। अगर निर्मला सप्रे को स्वीकार नहीं किया है, तो प्रदेश अध्यक्ष ये भी बताएं, चुनावी मैदान में आना है तो आखिर क्यों अदालत में देरी करवाई जा रही है। सिंघार ने कहा कि इन्हीं सब कारण से निर्मला सप्रे की सदस्यता को लेकर वे हाईकोर्ट गए। कल सुनवाई हुई थी, लेकिन 16 मई को अब अगली सुनवाई होगी।
भोपाल। बीना से विधायक निर्मला सप्रे एक बार फिर से सियासी हलचल का केंद्र बन गई हैं। कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीतने के बाद भाजपा में शामिल हुईं निर्मला सप्रे ने अब तक विधायक पद से इस्तीफा नहीं दिया है और इसी बीच उनका नाम भाजपा की मंडल कार्यसमिति में शामिल होने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इसके बाद एक बार फिर कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष से मांग की है कि निर्मला सप्रे की सदस्यता समाप्त की जाए। हालात ऐसे बन गए हैं कि निर्मला सप्रे को ना तो कांग्रेस स्वीकार कर पा रही है और ना ही भाजपा उन्हें अपना रही है।
दरअसल हाल ही में भाजपा के सागर जिला अध्यक्ष श्याम तिवारी द्वारा जारी मंडल कार्यसमितियों की सूची में बीना नगर मंडल में विधायक निर्मला सप्रे को “स्थायी आमंत्रित सदस्य“ के रूप में शामिल किया गया था। यह सूची सामने आते ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई। कांग्रेस ने इस पर कड़ा एतराज जताया और विधायक पद से इस्तीफे की मांग की। हालांकि, कुछ ही घंटों में भाजपा ने इस सूची को एक “टाइपिंग मिस्टेक“ बताते हुए संशोधित सूची जारी की, जिसमें निर्मला सप्रे का नाम हटा दिया गया। सागर भाजपा अध्यक्ष श्याम तिवारी ने स्पष्ट किया कि पहली सूची गलती से जारी हो गई थी और अब सही सूची प्रकाशित कर दी गई है। भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी ने भी कहा कि यह केवल टाइपिस्ट की त्रुटि थी।
कांग्रेस ने भाजपा की इस सफाई को खारिज करते हुए सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि क्या भाजपा में टाइपिंग मिस्टेक से ही टिकट का बंटवारा होता है? विधानसभा अध्यक्ष को चाहिए कि निर्मला सप्रे की सदस्यता रद्द करें और बीना में उपचुनाव करवाएं। विवाद के चलते राज्य की सियासत गरमाई हुई है और यह देखना दिलचस्प होगा कि विधानसभा अध्यक्ष इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं। फिलहाल कांग्रेस भाजपा पर हमला तेज कर चुकी है, वहीं भाजपा पूरे मामले को प्रशासनिक भूल बताकर टालने की कोशिश कर रही है। दरअसल लोकसभा चुनाव के दौरान चुनावी मंच पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के सामने भाजपा का गमछा पहन कर भाजपा में आने का ऐलान करने वाली सागर जिले की कांग्रेस से जीती एकमात्र बीना विधायक निर्मला सप्रे ने अभी तक अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है।
भाजपा स्पष्ट करे, निर्मला को स्वीकार किया या नहीं
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बयान देते हुए कहा कि भाजपा स्पश्ट करें की उन्होंने निर्मला सप्रे को स्वीकार किया है या नहीं। अगर निर्मला सप्रे को स्वीकार नहीं किया है, तो प्रदेश अध्यक्ष ये भी बताएं, चुनावी मैदान में आना है तो आखिर क्यों अदालत में देरी करवाई जा रही है। सिंघार ने कहा कि इन्हीं सब कारण से निर्मला सप्रे की सदस्यता को लेकर वे हाईकोर्ट गए। कल सुनवाई हुई थी, लेकिन 16 मई को अब अगली सुनवाई होगी।
