जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के पहले अंतर्कलह के आसार
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बैठकों, कार्यक्रमों से नेताओं की दूरी, बढ़ा रही चिंता
भोपाल। मध्यप्रदेश में कांग्रेस द्वारा प्रादेशिक सम्मेलन आयोजित किया जाना है। इसके पहले प्रदेश प्रभारी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दोनों ही ने अंचलों के दौरे तेज कर दिए हैं। साथ ही संगठनात्मक बैठकें भी हो रही है, मगर इन कार्यक्रमों में कुछ नेताओं की दूरी कांग्रेस के लिए चिंता का कारण बन सकती है। इसके पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि जिला अध्यक्षों की नियुक्ति है। माना जा रहा है कि दिल्ली के निर्देश को पूर्णतः लागू कराने का प्रदेश अध्यक्ष पूरा प्रयास करेंगे, जिससे इन नेताओं को उपेक्षा की शिकार होना पड़ेगा।
गुजरात अधिवेशन के बाद प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी दोनों ही इन दिनों प्रदेश के अलग-अलग अंचलों में सक्रियता दिखाते हुए कार्यक्रम कर रहे हैं। मगर इन नेताओं की बैठकों के दौरान यह नजारा भी देखा जा रहा है कि पार्टी के कुछ नेता इन कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए हैं। वहीं प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में होने वाली बैठकों में भी ये नेता दूर नजर आ रहे हैं। इसके चलते एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है क 2028 में भाजपा को करारी टक्कर देने की बात करने वाले कांग्रेस नेता कैसे एकजुट होंगे? नेताओं की कार्यक्रमों से दूरी को लेकर माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व प्रादेशिक अधिवेशन से पहले मई के शुरुआत में जिलाध्यक्ष समेत अन्य पदाधिकारियों की घोषणा कर सकता है। ऐसे में कांग्रेस नेताओं के बीच अपने-अपने खेमों से जिलाध्यक्ष बनवाने की होड़ मची है, मगर प्रदेश अध्यक्ष ने साफ कर दिया है कि दिल्ली से आने वाले पर्यवेक्षक ही तय करेंगे कि कौन जिला अध्यक्ष होगा।
पटवारी अपने हिसाब से बना़ पाएंगे नई कांग्रेस ?
पार्टी सूत्रों के अनुसार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी शीर्ष नेतृत्व के निर्देशानुसार प्रदेश में नई तरह की कांग्रेस गढ़ना चाहते हैं। इसी क्रम में अब जिलाध्यक्षों की घोषणा भी नए तरीके से होगी। इसके लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक भोपाल आएंगे। खास बात यह है कि किसी नेता विशेष की सिफारिश पर किसी अपरिचित चेहरो को संगठन में जगह नहीं मिलेगी। हालांकि यह देखना दिलचस्व होगा कि पटवारी अपनी रणनीति में कामयाब हो पाते हैं या फिर हमेशा की तरह जिलाध्यक्षों की घोषणा में खेमेबाजी पर हावी रहती है।
भोपाल। मध्यप्रदेश में कांग्रेस द्वारा प्रादेशिक सम्मेलन आयोजित किया जाना है। इसके पहले प्रदेश प्रभारी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दोनों ही ने अंचलों के दौरे तेज कर दिए हैं। साथ ही संगठनात्मक बैठकें भी हो रही है, मगर इन कार्यक्रमों में कुछ नेताओं की दूरी कांग्रेस के लिए चिंता का कारण बन सकती है। इसके पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि जिला अध्यक्षों की नियुक्ति है। माना जा रहा है कि दिल्ली के निर्देश को पूर्णतः लागू कराने का प्रदेश अध्यक्ष पूरा प्रयास करेंगे, जिससे इन नेताओं को उपेक्षा की शिकार होना पड़ेगा।
गुजरात अधिवेशन के बाद प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी दोनों ही इन दिनों प्रदेश के अलग-अलग अंचलों में सक्रियता दिखाते हुए कार्यक्रम कर रहे हैं। मगर इन नेताओं की बैठकों के दौरान यह नजारा भी देखा जा रहा है कि पार्टी के कुछ नेता इन कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए हैं। वहीं प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में होने वाली बैठकों में भी ये नेता दूर नजर आ रहे हैं। इसके चलते एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है क 2028 में भाजपा को करारी टक्कर देने की बात करने वाले कांग्रेस नेता कैसे एकजुट होंगे? नेताओं की कार्यक्रमों से दूरी को लेकर माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व प्रादेशिक अधिवेशन से पहले मई के शुरुआत में जिलाध्यक्ष समेत अन्य पदाधिकारियों की घोषणा कर सकता है। ऐसे में कांग्रेस नेताओं के बीच अपने-अपने खेमों से जिलाध्यक्ष बनवाने की होड़ मची है, मगर प्रदेश अध्यक्ष ने साफ कर दिया है कि दिल्ली से आने वाले पर्यवेक्षक ही तय करेंगे कि कौन जिला अध्यक्ष होगा।
पटवारी अपने हिसाब से बना़ पाएंगे नई कांग्रेस ?
पार्टी सूत्रों के अनुसार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी शीर्ष नेतृत्व के निर्देशानुसार प्रदेश में नई तरह की कांग्रेस गढ़ना चाहते हैं। इसी क्रम में अब जिलाध्यक्षों की घोषणा भी नए तरीके से होगी। इसके लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक भोपाल आएंगे। खास बात यह है कि किसी नेता विशेष की सिफारिश पर किसी अपरिचित चेहरो को संगठन में जगह नहीं मिलेगी। हालांकि यह देखना दिलचस्व होगा कि पटवारी अपनी रणनीति में कामयाब हो पाते हैं या फिर हमेशा की तरह जिलाध्यक्षों की घोषणा में खेमेबाजी पर हावी रहती है।
