नौ संकल्प नई ऊर्जा का बनेंगे स्त्रोत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
विश्व नवकार महामंत्र दिवस पर रवीन्द्र भवन भोपाल में आयोजित किया गया कार्यक्रम
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए नौ संकल्पों से निश्चित ही नई ऊर्जा के स्त्रोत बनेंगे। उन्होंने नौ संकल्पों के पालन करने का आह्वान प्रदेश के नागरिकों से किया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से नौ संकल्पों के पालन का आहवान किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में नवकार महामंत्र दिवस पर समारोह का शुभारंभ करते हुए नवकार मंत्र के महत्व को रेखांकित किया और मंत्र को एकीकृत ऊर्जा का प्रवाह बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नवकार महामंत्र नई पीढ़ी के लिए ज्ञान और दिशा के स्त्रोत के रूप में कार्य कर सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने सामूहिक नवकार मंत्र के जाप के बाद सभी से नौ संकल्प लेने का आग्रह किया।
ये है नौ संकल्प
पहला संकल्प – जल संरक्षण, दूसरा संकल्प – एक पेड़ मां के नाम, तीसरा संकल्प – स्वच्छता का मिशन, चौथा संकल्प – वोकल फॉर लोकल, पांचवाँ संकल्प – देश दर्शन, छठा संकल्प – नैचुरल फार्मिंग को अपनाना, सातवाँ संकल्प – हेल्दी लाइफ स्टाइल को अपनाना, आठवाँ संकल्प – योग और खेल को जीवन में लाना और नौवाँ संकल्प – गरीबों की सहायता का संकल्प है।
सबसे शक्तिशाली मंत्री है नवकार महामंत्र
उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि नवकार महामंत्र जैन धर्म का सबसे पावन एवं शक्तिशाली मंत्र है, जो विनम्रता, अहिंसा, भाईचारे और आत्मशुद्धि का संदेश देता है। यह मंत्र न केवल मानसिक शांति और आंतरिक संतुलन का माध्यम है, बल्कि विश्व में सद्भाव और शांति की स्थापना का प्रभावी सूत्र भी है। उप मुख्यमंत्री ने विश्व नवकार महामंत्र दिवस पर रवीन्द्र भवन भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में मुनिश्री आचार्य प्रमाण सागर महाराज एवं अन्य आचार्यगण से आशीर्वाद प्राप्त किया। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज आध्यात्मिक पुनरुत्थान और सांस्कृतिक जागरण की दिशा में तेज़ी से अग्रसर है। भारत की आत्मा उसकी अध्यात्म-समृद्ध परंपरा में निहित है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से हम उस आत्मा को पुनः जाग्रत करने का कार्य कर रहे हैं।
जब आत्मा स्वयं को पहचानती है, तब वह महावीर बनती हैः आचार्य प्रमाण सागर
मुनिश्री आचार्य प्रमाण सागर महाराज ने वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में नवकार महामंत्र की प्रासंगिकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जब विश्व आतंक, हिंसा और युद्ध के भयावह दौर से गुजर रहा है, तब नवकार महामंत्र शांति, सह-अस्तित्व और आत्मबोध की ओर मार्गदर्शन करता है। उन्होंने कहा कि महावीर का जन्म नहीं, निर्माण होता है कृ जब आत्मा स्वयं को पहचानती है, तब वह महावीर बनती है। आचार्य प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि सच्चा वंदन केवल बाह्य अर्चना नहीं बल्कि अपने अस्तित्व के प्रति जागरूकता है। जब हम अपने अंदर के महावीर को पहचानते हैं और उसका वंदन करते हैं, तभी हम सम्पूर्ण विश्व का वंदन कर रहे होते हैं। नवकार मंत्र की आराधना सम्पूर्ण विश्व की शांति के लिए है। उन्होंने कहा कि धर्म का आश्रय, अर्थात् सत्य, तप, अनुशासन और धैर्य को जीवन में अपनाना आवश्यक है। धर्म को अपने स्वभाव और प्रवृत्ति में लाने से ही समाज और राष्ट्र का कल्याण संभव है।
