मिडिल स्कूल में प्रवेश दिलाने की जिम्मेदारी होगी शिक्षकों की
0
भोपाल। प्रदेश में सरकारी स्कूलों में बच्चों की घटती संख्या को देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग इस साल एक अप्रैल से प्रवेश उत्सव अभियान शुरू करेगा। इसमें तीस सितंबर तक छह साल की उम्र पूरी करने वाले बच्चों को प्रवेश दिए जाने और पांचवीं क्लास पास करने वाले बच्चे को छठवीं कक्षा में मिडिल स्कूल में प्रवेश दिलाने की जिम्मेदारी अभिभावकों के साथ शिक्षकों को भी सौंपी गई है।
सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने इस साल नई शिक्षा नीति के अंतर्गत नर्सरी क्लास में भी प्रवेश दिया जाएगा। स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति के अंतर्गत सरकारी स्कूलों में नर्सरी क्लास में बच्चों को भेजने का प्रावधान कर रहे हैं। इसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग 1 अप्रैल से प्रवेश उत्सव अभियान चलाएगा। प्रवेश उत्सव अभियान में हम मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों एवं जनप्रतिनिधियों से सम्मिलित होने का आग्रह करेंगे। प्रवेश उत्सव अभियान के सभी लोग सरकारी स्कूलों में प्रवेश के लिए बच्चों ओर उनके अभिभावकों से चर्चा करेंगे। इसमें यह अपील होगी कि राजनीतिक पृष्ठभूमि से हटकर सभी सरकारी स्कूलों में बच्चों के प्रवेश में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं ताकि सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या में वृद्धि हो। अभी तीस अप्रेल को छह साल की उम्र पूरी करने वाले बच्चों को एडमिशन दिया जाता है लेकिन अब सरकार ने तीस सितंबर तक छह साल की उम्र पूरी करने वाले बच्चों को एडमिशन देने का निर्णय लिया है।
“हैंड ओवर – टेक ओवर“ प्रक्रिया होगी शुरू
मंत्री ने कहा कि अभी पांचवी क्लास में पढ़ने वाले बच्चे का अगली क्लास में प्रवेश दिलाने की जिम्मेदारी सरकार की नहीं थी। ऐसे में प्राइमरी स्कूल से शिक्षा पूरी होने के बाद बच्चा कहां गया, इसकी जानकारी स्कूल शिक्षा विभाग को नहीं होती थी। या तो वह बच्चा निजी स्कूल में चला जाता है या नहीं पढ़ता है, ऐसे में इस स्थिति को रोकने की भी व्यवस्था की जा रही है। सरकार ने तय किया है कि 5वीं पास बच्चों को लेकर प्राइमरी स्कूल के हेडमास्टर मिडिल स्कूल के हेडमास्टर को ऐसे बच्चों को दस्तावेज के साथ मिडिल स्कूलों को सौपेंगे। इस प्रक्रिया में स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षकों और कर्मचारी को सम्मिलित करेंगे। शिक्षा विभाग इसके लिए “हैंड ओवर – टेक ओवर“ की प्रक्रिया भी शुरू करेगा जिसका दारोमदार प्राइमरी स्कूल के हेडमास्टर को सौंपेंगे। इससे पांचवीं से निकलने वाला बच्चा छठी क्लास में भी सरकारी स्कूल में ही जा सकेगा और सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या में कमी आने से रोकी जा सकेगी।
सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने इस साल नई शिक्षा नीति के अंतर्गत नर्सरी क्लास में भी प्रवेश दिया जाएगा। स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति के अंतर्गत सरकारी स्कूलों में नर्सरी क्लास में बच्चों को भेजने का प्रावधान कर रहे हैं। इसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग 1 अप्रैल से प्रवेश उत्सव अभियान चलाएगा। प्रवेश उत्सव अभियान में हम मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों एवं जनप्रतिनिधियों से सम्मिलित होने का आग्रह करेंगे। प्रवेश उत्सव अभियान के सभी लोग सरकारी स्कूलों में प्रवेश के लिए बच्चों ओर उनके अभिभावकों से चर्चा करेंगे। इसमें यह अपील होगी कि राजनीतिक पृष्ठभूमि से हटकर सभी सरकारी स्कूलों में बच्चों के प्रवेश में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं ताकि सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या में वृद्धि हो। अभी तीस अप्रेल को छह साल की उम्र पूरी करने वाले बच्चों को एडमिशन दिया जाता है लेकिन अब सरकार ने तीस सितंबर तक छह साल की उम्र पूरी करने वाले बच्चों को एडमिशन देने का निर्णय लिया है।
“हैंड ओवर – टेक ओवर“ प्रक्रिया होगी शुरू
मंत्री ने कहा कि अभी पांचवी क्लास में पढ़ने वाले बच्चे का अगली क्लास में प्रवेश दिलाने की जिम्मेदारी सरकार की नहीं थी। ऐसे में प्राइमरी स्कूल से शिक्षा पूरी होने के बाद बच्चा कहां गया, इसकी जानकारी स्कूल शिक्षा विभाग को नहीं होती थी। या तो वह बच्चा निजी स्कूल में चला जाता है या नहीं पढ़ता है, ऐसे में इस स्थिति को रोकने की भी व्यवस्था की जा रही है। सरकार ने तय किया है कि 5वीं पास बच्चों को लेकर प्राइमरी स्कूल के हेडमास्टर मिडिल स्कूल के हेडमास्टर को ऐसे बच्चों को दस्तावेज के साथ मिडिल स्कूलों को सौपेंगे। इस प्रक्रिया में स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षकों और कर्मचारी को सम्मिलित करेंगे। शिक्षा विभाग इसके लिए “हैंड ओवर – टेक ओवर“ की प्रक्रिया भी शुरू करेगा जिसका दारोमदार प्राइमरी स्कूल के हेडमास्टर को सौंपेंगे। इससे पांचवीं से निकलने वाला बच्चा छठी क्लास में भी सरकारी स्कूल में ही जा सकेगा और सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या में कमी आने से रोकी जा सकेगी।
