नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए भी भाजपा को करनी पड़ रही मशक्कत
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जनवरी माह में ही मिल सकता है नया प्रदेश अध्यक्ष
भोपाल। मध्यप्रदेश भाजपा के अगले प्रदेश अध्यक्ष के लिए दावेदारों की सक्रियता अब दिल्ली तक बढ़ गई है। माना जा रहा है कि इस महीने प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोशणा हो जाएगी। जिला अध्यक्षों के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चयन में भी भाजपा को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण बैठाने का प्रयास संगठन कर रहा है, ताकि चार साल बाद जब विधानसभा चुनाव हो तो इसका फायदा पार्टी को मिल सके।
मध्यप्रदेश में वैसे तो भाजपा ने नए प्रदेश अध्यक्ष का नाम तय करने की तारीख 15 जनवरी तय की थी, मगर जिला अध्यक्षों की नियुक्ति में हुई देरी के कारण प्रदेश अध्यक्ष के चयन में भी विलंब हुआ है। माना जा रहा है जनवरी माह में ही भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष मिल सकता है। इसके लिए दावेदारी ने भी सक्रियता बढ़ा दी है। भोपाल से लेकर दिल्ली तक दावेदार अपनी जमावट में जुटे हैं। कुछ ने संघ से भी निकटता का फायदा उठाते हुए संघ पदाधिकारियों से अपनी पैरवी कराने के प्रयास तेज किए हैं। वैसे भाजपा इस बार प्रदेश अध्यक्ष चयन के लिए चौंकाने वाला नाम भी दे सकती है। माना जा रहा है कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद पर किसी महिला नेत्री को भी मौका दे सकती है। इसके चलते सागर की सांसद लता वानखेड़े, पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस, राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार, रीति पाठक और शहडोल की सांसद हिमाद्री सिंह के नाम प्रमुख है। इनमें लता वानखेडे संगठन से लंबे समय तक जुड़ी रही है। वे महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुकी है।
जातीय समीकरण से देखे तो अगर पार्टी फिर से ब्राम्हण चेहरे पर दांव खेलती है तो पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के नाम पर विचार हो सकता है। मिश्रा के अलावा आशीष दुबे के नाम की भी चर्चा है। मगर पार्टी नेता इस बार ब्राह्मण चेहरे पर दाव खेलने की बात को कम ही मान रहे हैं। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष भी ब्राह्मण है, इस लिहाज से मिश्रा का नंबर कट सकता है। मिश्रा के अलावा प्रदेश अध्यक्ष के दावेदारों में अरविंद भदौरिया, हेमंत खंडेलवाल, आशीष दुबे के नाम चल रहे हैं। वहीं दलित आदिवासी नेताओं में फग्गन सिंह कुलस्ते,लाल सिंह आर्य,सुमेर सिंह सोलंकी,महेंद्र सोलंकी और लता वानखेड़े के नाम तेज़ी से चर्चाओं मे हैं।
सामान्य वर्ग के नेता को मिल सकता है मौका
ओबीसी वर्ग को तो फिलहाल भाजपा ने डा मोहन यादव की मुख्यमंत्री पद पर ताजपोशी के जरिए संतुष्ट कर दिया है, लेकिन सामान्य वर्ग की नाराज़गी फिलहाल भाजपा से बनी हुई है। भाजपा की कोशिश है सामान्य वर्ग की महिला को प्रदेश अध्यक्ष की कमान देने पर ना सिर्फ सामान्य वर्ग संतुष्ट होगा, बल्कि आधी आबादी का भी भाजपा पर भरोसा बढ़ेगा। वहीं भाजपा के एक और फॉर्मूले के तहत दलित आदिवासी वर्ग के चेहरे को मौका देने की बात भी आ रही है। क्योंकि मौका देकर प्रदेश की 37 फीसदी आबादी को खुश करने की कोशिश में भी रहेगी। बहरहाल मध्यप्रदेश में चार साल बाद विधानसभा चुनाव हैं। ऐसे में पार्टी की नए सिरे से जमावट के लिए भरपूर मौका है। इसलिए भाजपा उलटफेर करके चौंका भी सकती है।
भोपाल। मध्यप्रदेश भाजपा के अगले प्रदेश अध्यक्ष के लिए दावेदारों की सक्रियता अब दिल्ली तक बढ़ गई है। माना जा रहा है कि इस महीने प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोशणा हो जाएगी। जिला अध्यक्षों के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चयन में भी भाजपा को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण बैठाने का प्रयास संगठन कर रहा है, ताकि चार साल बाद जब विधानसभा चुनाव हो तो इसका फायदा पार्टी को मिल सके।
मध्यप्रदेश में वैसे तो भाजपा ने नए प्रदेश अध्यक्ष का नाम तय करने की तारीख 15 जनवरी तय की थी, मगर जिला अध्यक्षों की नियुक्ति में हुई देरी के कारण प्रदेश अध्यक्ष के चयन में भी विलंब हुआ है। माना जा रहा है जनवरी माह में ही भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष मिल सकता है। इसके लिए दावेदारी ने भी सक्रियता बढ़ा दी है। भोपाल से लेकर दिल्ली तक दावेदार अपनी जमावट में जुटे हैं। कुछ ने संघ से भी निकटता का फायदा उठाते हुए संघ पदाधिकारियों से अपनी पैरवी कराने के प्रयास तेज किए हैं। वैसे भाजपा इस बार प्रदेश अध्यक्ष चयन के लिए चौंकाने वाला नाम भी दे सकती है। माना जा रहा है कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद पर किसी महिला नेत्री को भी मौका दे सकती है। इसके चलते सागर की सांसद लता वानखेड़े, पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस, राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार, रीति पाठक और शहडोल की सांसद हिमाद्री सिंह के नाम प्रमुख है। इनमें लता वानखेडे संगठन से लंबे समय तक जुड़ी रही है। वे महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुकी है।
जातीय समीकरण से देखे तो अगर पार्टी फिर से ब्राम्हण चेहरे पर दांव खेलती है तो पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के नाम पर विचार हो सकता है। मिश्रा के अलावा आशीष दुबे के नाम की भी चर्चा है। मगर पार्टी नेता इस बार ब्राह्मण चेहरे पर दाव खेलने की बात को कम ही मान रहे हैं। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष भी ब्राह्मण है, इस लिहाज से मिश्रा का नंबर कट सकता है। मिश्रा के अलावा प्रदेश अध्यक्ष के दावेदारों में अरविंद भदौरिया, हेमंत खंडेलवाल, आशीष दुबे के नाम चल रहे हैं। वहीं दलित आदिवासी नेताओं में फग्गन सिंह कुलस्ते,लाल सिंह आर्य,सुमेर सिंह सोलंकी,महेंद्र सोलंकी और लता वानखेड़े के नाम तेज़ी से चर्चाओं मे हैं।
सामान्य वर्ग के नेता को मिल सकता है मौका
ओबीसी वर्ग को तो फिलहाल भाजपा ने डा मोहन यादव की मुख्यमंत्री पद पर ताजपोशी के जरिए संतुष्ट कर दिया है, लेकिन सामान्य वर्ग की नाराज़गी फिलहाल भाजपा से बनी हुई है। भाजपा की कोशिश है सामान्य वर्ग की महिला को प्रदेश अध्यक्ष की कमान देने पर ना सिर्फ सामान्य वर्ग संतुष्ट होगा, बल्कि आधी आबादी का भी भाजपा पर भरोसा बढ़ेगा। वहीं भाजपा के एक और फॉर्मूले के तहत दलित आदिवासी वर्ग के चेहरे को मौका देने की बात भी आ रही है। क्योंकि मौका देकर प्रदेश की 37 फीसदी आबादी को खुश करने की कोशिश में भी रहेगी। बहरहाल मध्यप्रदेश में चार साल बाद विधानसभा चुनाव हैं। ऐसे में पार्टी की नए सिरे से जमावट के लिए भरपूर मौका है। इसलिए भाजपा उलटफेर करके चौंका भी सकती है।
