संघ की तीन दिवसीय बैठक में संगठनात्मक बदलावों पर होगा मंथन
संघ प्रमुख की उपस्थिति में इंदौर में तीन दिन चलेगा विचार-विमर्श
भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की संगठनात्मक व्यवस्था में प्रस्तावित बदलावों और भविष्य की कार्ययोजना को लेकर 2 नवंबर से इंदौर में तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक शुरू होगी। संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत की उपस्थिति में होने वाली इस बैठक में संगठन के वर्तमान ढांचे की समीक्षा के साथ नई व्यवस्थाओं, पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों और आगामी रणनीति पर विस्तार से मंथन किया जाएगा। बैठक में संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा भी प्रमुख एजेंडे में रहेगी।
बैठक के लिए संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी इंदौर पहुंच चुके हैं। बैठक में सभी छह सह सरकार्यवाह, विभिन्न कार्य विभागों के प्रमुख और अखिल भारतीय कार्यकारिणी के 408 सदस्य शामिल होंगे। संगठनात्मक दृष्टि से इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि संघ अपनी व्यवस्थाओं में बदलाव की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अब प्रांत के बजाय संभागीय क्षेत्र के आधार पर संगठन का कामकाज संचालित करने पर विचार किया जाएगा। इसके अनुरूप पदाधिकारियों की नई भूमिकाएं और जिम्मेदारियां भी तय की जा सकती हैं। बैठक में संगठनात्मक चुनावों की तैयारी और उनकी प्रक्रिया पर भी चर्चा होगी। मार्च में सरसंघचालक, सरकार्यवाह सहित अन्य प्रमुख पदों और जिला स्तर पर चुनाव होने हैं। ऐसे में चुनावों की रूपरेखा तैयार करने के साथ संगठन के विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारियों के निर्धारण को लेकर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत कुछ पदों पर पदाधिकारियों की घोषणा होने की संभावना भी है।
संघ के कार्यक्रमों की होगी समीक्षा
तीन दिवसीय बैठक में संगठन के शताब्दी वर्ष के तहत देशभर में चल रहे कार्यक्रमों की प्रगति और उनके क्रियान्वयन की समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा देश में हाल के दिनों में हुए आंदोलनों के दौरान सोशल मीडिया पर चलाए गए अभियानों की सामग्री, नशीले पदार्थों के बढ़ते प्रसार और बाहरी शक्तियों के हस्तक्षेप जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी। इन मुद्दों के विभिन्न पहलुओं पर विचार करते हुए आगे की कार्ययोजना और रणनीति तैयार की जाएगी। कुल मिलाकर इंदौर में होने वाली यह बैठक संगठनात्मक बदलावों, शताब्दी वर्ष की गतिविधियों की समीक्षा और भविष्य की कार्य दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगी।
