बिना प्रशासनिक मंजूरी के नहीं मिलेंगे खुले आसमान के अधिकार
भोपाल। प्रदेश की खुली जेलों में सजा काट रहे कैदियों को भेजने की व्यवस्था को राज्य सरकार ने और अधिक सख्त और पारदर्शी बना दिया है। अब किसी भी बंदी को ओपन जेल में स्थानांतरित करने के लिए केवल चयन समिति की सिफारिश ही काफी नहीं होगी, बल्कि ’’राज्य सरकार का प्रशासनिक अनुमोदन अनिवार्य’’ होगा। सरकार से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही कैदी को खुली कॉलोनी में भेजा जा सकेगा।
गृह विभाग ने इसके लिए 17 साल पुराने मध्य प्रदेश के चयनित सिद्धदोष बंदियों के लिए खुली कालोनी नियम 2009 में व्यापक संशोधन किया है। नए प्रावधानों का उद्देश्य जेल प्रशासन की जवाबदेही तय करना और सुरक्षा मानकों को मजबूत बनाना है। ओपन जेल में भेजे जाने के लिए सजा की अवधि का एक बड़ा हिस्सा पूरा करना जरूरी होता है। इसके तहत केवल वही कैदी विचार योग्य होते हैं जो आजीवन कारावास या कम से कम 7 साल या उससे अधिक की सजा काट रहे हों। बंदी को अपनी कुल सजा का आधा से दो-तिहाई हिस्सा जेल में पूरा करना अनिवार्य है।
इन बंदियों को नहीं मिलेगी छूट
कानून और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि गंभीर और खूंखार अपराधियों को इस छूट का लाभ नहीं मिलेगा। आदतन अपराधी, डकैती या राज्य के खिलाफ अपराध के दोषी और समाज व राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा मानने वाले कैदियों को खुली जेल प्रणाली में प्रवेश के लिए पूरी तरह अयोग्य घोषित किया गया है।
