बॉर्डर चेकपोस्ट बंद होने के बाद परिवहन राजस्व में आई कमी
हाइटेक उपकरणों के बावजूद घट गए चालान
भोपाल। मध्यप्रदेश में पारदर्शी परिवहन व्यवस्था और हाइवे को जाम-मुक्त बनाने के राज्य सरकार के बड़े दावों पर खुद विधानसभा में पेश हुए सरकारी आंकड़ों ने सवालिया निशान लगा दिए हैं। प्रदेश के बॉर्डर चेकपोस्ट बंद कर शुरू की गई नई स्मार्ट व्यवस्था से न केवल सरकार का खजाना खाली हो रहा है, बल्कि सड़क सुरक्षा के मोर्चे पर भी स्थिति गंभीर बनी हुई है।
कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल द्वारा पूछे गए सवाल के लिखित उत्तर में परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह द्वारा पेश किए गए आंकड़ों से सामने आया है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद सरकार का राजस्व लगभग 60 प्रतिशत तक घट गया है। मंत्री द्वारा सदन में पेष किए आंकड़ों के अनुसार पुरानी व्यवस्था (45 स्थायी चेकपोस्ट) जुलाई 2022 से जून 2024 तक 24 माह में 4,56,427 चालान काटे गए, जिस पर 183 करोड़ का राजस्व मिला। वहीं नई व्यवस्था के तहत जुलाई 2024 से जून 2026 तक 24 माह की अवधि में 2,60,178 चालान काटे और 73.30 करोड़ का राजस्व वसूला।
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने 1 जुलाई 2024 को 45 स्थायी चेकपोस्ट बंद कर 12 जुलाई 2024 से नए ‘रोड सेफ्टी एंड एनफोर्समेंट चेकिंग पॉइंट्स’ शुरू किए थे। हालांकि, दो सालों की तुलना में चालानों की संख्या में लगभग 2 लाख की कमी आई और वसूली घटकर एक-तिहाई से भी कम 73.30 करोड़ रह गई।
कागजी साबित हो रहे हाई-टेक उपकरण
परिवहन मंत्री ने सदन को बताया कि मैदानी अमले को पारदर्शी निगरानी के लिए बॉडी-वार्न कैमरे, पीओएस मशीनें और स्पीड रडार गन जैसे आधुनिक उपकरण दिए गए हैं, जिनकी मॉनिटरिंग केंद्रीय कमांड सेंटर से होती है। इसके विपरीत, विपक्ष ने इन दावों को पूरी तरह खारिज किया है।
खर्च ज्यादा, कमाई कम
विधायक ग्रेवाल का आरोप है कि वर्तमान में प्रत्येक चेकिंग पॉइंट से औसतन केवल 7 लाख प्रतिमाह का राजस्व मिल रहा है, जबकि वहां तैनात स्टाफ के वेतन, ईंधन और हाई-टेक उपकरणों के रखरखाव का खर्च इससे कहीं अधिक है। नई व्यवस्था का मूल उद्देश्य सड़क सुरक्षा था, लेकिन चेकिंग पॉइंट्स बनने के बाद प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में दोगुनी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उनका कहना है कि मैदानी अमले का ध्यान सड़क सुरक्षा और नियम पालन कराने के बजाय केवल वाहनों से अवैध वसूली पर केंद्रित है।
