बेंगलुरु ट्रिपल मर्डर में एआई चैटबॉट की एंट्री, हत्या की साजिश रचने के लिए ली गई मदद
बेंगलुरु. कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में हुए चर्चित ट्रिपल मर्डर केस की जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है. पुलिस का दावा है कि हत्या के आरोपियों ने तीन लोगों की हत्या की साजिश रचने और उसे अंजाम देने की योजना बनाने में एक एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) चैटबॉट की मदद ली थी. जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी पिछले छह महीने से इस वारदात की तैयारी कर रहे थे. अब बेंगलुरु पुलिस ने संबंधित एआई कंपनी को पत्र लिखकर आरोपियों की चैट हिस्ट्री उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने किस प्रकार की जानकारी हासिल की थी और हत्या की योजना किस स्तर तक एआई की सहायता से बनाई गई.
यह मामला 22 जून का है, जब 52 वर्षीय सोमसुंदर, उनकी 48 वर्षीय पत्नी मुथुलक्ष्मी और 19 वर्षीय बेटी सुप्रिया अपने घर में मृत पाए गए थे. तीनों की चाकू मारकर हत्या की गई थी. घटना के कुछ दिन बाद पुलिस ने मृत दंपति की बड़ी बेटी श्वेता और उसके लिव-इन पार्टनर केनेथ को पुडुचेरी से गिरफ्तार किया था. पुलिस के अनुसार वारदात के बाद दोनों गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार होकर वहां छिपे हुए थे.
जांच में सामने आया कि श्वेता ने अपनी मां से करीब 50 लाख रुपये उधार लिए थे, ताकि केनेथ क्लाउड किचन का व्यवसाय शुरू कर सके. हालांकि कारोबार शुरू नहीं हो पाया और आर्थिक संकट गहराने लगा. पुलिस का दावा है कि रुपये लौटाने का दबाव बढ़ने के बाद दोनों ने परिवार के तीन सदस्यों की हत्या की साजिश रची.
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, हत्या की योजना बनाते समय आरोपी लगातार एआई चैटबॉट से सलाह लेते रहे. उन्होंने चैटबॉट से यह जानने की कोशिश की कि किसी व्यक्ति की हत्या कैसे की जाए, शवों को ठिकाने लगाने के क्या तरीके हो सकते हैं, खून के निशान कैसे मिटाए जाएं और क्या क्लाउड किचन के लिए तैयार की गई भट्ठी का इस्तेमाल शवों को जलाने के लिए किया जा सकता है. पुलिस का कहना है कि इन सभी सवालों के डिजिटल रिकॉर्ड की जांच मामले की सच्चाई सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, हत्या की योजना तैयार करने में केनेथ की प्रमुख भूमिका थी, जबकि श्वेता भी पूरी साजिश में शामिल थी. जांच में यह भी सामने आया है कि केनेथ लंबे समय से सामाजिक रूप से अलग-थलग जीवन जी रहा था. पुलिस और मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि उसका दोस्तों और परिवार से लगभग कोई संपर्क नहीं था. वहीं श्वेता आर्थिक रूप से उसकी मदद कर रही थी और कथित तौर पर उसके प्रभाव में आकर उसने आईटी क्षेत्र की अपनी नौकरी भी छोड़ दी थी.
पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच करा रही है. साथ ही एआई कंपनी से मांगी गई चैट हिस्ट्री के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि हत्या की पूरी योजना किस प्रकार तैयार की गई और तकनीक का इस्तेमाल किस हद तक किया गया. जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला आधुनिक तकनीक के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण हो सकता है. फिलहाल दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और पुलिस मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है.
