निवेशकों का बढ़ा भरोसा, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी में सुधार की दरकार
नीति आयोग की रिपोर्ट, तुरंत रिस्पॉन्स ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा
भोपाल। नीति आयोग द्वारा हाल ही में जारी किए गए निवेश अनुकूलता सूचकांक में मध्य प्रदेश ने देश के औद्योगिक नक्शे पर एक मजबूत और उभरते हुए केंद्र के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वहीं आयोग ने कुछ खामियां भी मानी है। आयोक की रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि प्रदेष में निवेशकों का भरोसा तो बढ़ा है, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी में सुधार की अब भी जरूरत हैं।
राज्यों में निवेश आकर्षित करने, सुधारों का मूल्यांकन करने और औद्योगिक गति को मापने के लिए तैयार किए गए इस सूचकांक में प्रदेश को 48.9 का कुल स्कोर मिला है। इस प्रदर्शन के साथ राज्य ने देश के बड़े राज्यों की श्रेणी में पांचवां स्थान हासिल किया है, जबकि अखिल भारतीय स्तर पर समग्र रैंकिंग में यह सातवें स्थान पर काबिज हुआ है। देश के केंद्र में स्थित होने के कारण यह उत्तर और दक्षिण भारत के बीच एक रणनीतिक कड़ी का काम कर रहा है, जिसका सीधा फायदा इसके औद्योगिक और बुनियादी ढांचे के विकास को मिल रहा है। नीति आयोग की रिपोर्ट स्पष्ट किया है कि यदि राज्य सरकार प्रशासनिक तालमेल को बेहतर करते हुए सड़कों और हवाई कनेक्टिविटी की कमियों को दूर कर लेती है, तो आने वाले समय में प्रदेश शीर्ष तीन राज्यों में शुमार हो सकता है।
पूछताछ पर सटीक जानकारी
नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार जमीनी स्तर पर राज्य के अनुकूल व्यावसायिक माहौल के कई मजबूत पक्ष सामने आए हैं। राज्य की निवेश प्रोत्साहन एजेंसियां बेहद सक्रिय हैं। वे निवेशकों की पूछताछ पर न केवल तुरंत जवाब देती हैं, बल्कि पहले से ही सटीक जानकारी उपलब्ध कराती हैं, जिससे व्यापार का कुल अनुभव काफी बेहतर होता है।
सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम को सराहा
प्रदेश का सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम अपनी तेजी, प्रभावशीलता और पारदर्शिता के लिए सराहा गया है। नए उद्यमियों को व्यापार शुरू करने में इससे बड़ी राहत मिल रही है। सरकार ने वास्तविक उपयोग करने वालों को ही औद्योगिक भूमि देने की सख्त नीति अपनाई है। इस नीति के तहत आवंटित जमीन का उपयोग या तो उद्योग लगाने के लिए होगा, अन्यथा उसे वापस करना होगा। औद्योगिक भूमि के गैर-कानूनी ट्रांसफर पर पूरी तरह रोक है, जिससे भू-माफियाओं पर लगाम कसी है।
सड़कों की दोबारा खुदाई से नुकसान
एक तरफ जहां प्रदेश ने नीतिगत स्तर पर बाजी मारी है, वहीं रिपोर्ट में व्यावसायिक माहौल और भौतिक बुनियादी ढांचे में सुधार की सख्त जरूरत भी रेखांकित की गई है। रिपोर्ट में एक बड़ी प्रशासनिक खामी का जिक्र किया गया है। जिसमें कहा है कि सड़क मरम्मत के तुरंत बाद बिजली, प्लंबिंग या फाइबर ऑप्टिक लाइन बिछाने के लिए बिना किसी आपसी तालमेल के दोबारा खुदाई कर दी जाती है। इस लापरवाही से इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचता है।
एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना जरूरी
राज्य में हर 100 से 150 किलोमीटर के दायरे में हवाई पट्टी या एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की मांग की गई है ताकि दूरदराज के प्रोजेक्ट साइट्स तक निवेशकों की पहुंच तेज हो सके। फिलहाल, कनेक्टिंग फ्लाइट्स और एयर कनेक्टिविटी के मामले में राज्य को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
