तीसरी सीट पर शह-मात का खेल, भाजपा के चक्रव्यूह में फंसी कांग्रेस
भाजपा को दिल्ली के इशारे का इंतजार, आज साफ होगी राज्यसभा चुनाव की तस्वीर
भोपाल। प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की तीसरी सीट को लेकर सियासी बिसात बिछ चुकी है। मुकाबला अब शह-मात के उस मोड़ पर पहुंच गया है जहां भाजपा के एक गुप्त चक्रव्यूह ने कांग्रेस के खेमे में भारी बेचौनी पैदा कर दी है। कल सोमवार को नामांकन दाखिल करने का अंतिम दिन है, दोपहर तक यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि भाजपा इस सीट पर अपना तीसरा उम्मीदवार उतारकर कांग्रेस के समीकरण बिगाड़ेगी या नहीं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, भाजपा रणनीति के तहत अंतिम क्षणों तक अपने पत्ते नहीं खोल रही है। अंदरखाने खबर है कि संगठन ने दो अलग-अलग नामांकन फॉर्म (दस्तावेज) तैयार कर लिए हैं। फिलहाल प्रदेश नेतृत्व को केवल दिल्ली (केंद्रीय आलाकमान) के अंतिम इशारे का इंतजार है। यदि वहां से हरी झंडी मिलती है, तो अंतिम समय में नामांकन दाखिल कर मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया जाएगा। हालांकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल पहले ही यह कह चुके हैं कि पार्टी केवल दो सीटों पर चुनाव लड़ रही है, लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों के बयानों ने राजनीतिक बयार को पूरी तरह बदल दिया है। मुख्यमंत्री के संकेतों के बाद से ही सियासी गलियारों में अटकलें तेज हैं। चर्चा है कि यदि भाजपा तीसरा उम्मीदवार उतारती है, तो वह किसी बड़े आदिवासी चेहरे को मौका दे सकती है। इसके अलावा पूर्व विधायक जीतू जिराती का नाम भी रेस में सबसे आगे चल रहा है। दोनों ही दलों ने व्हिप जारी करते हुए अपने-अपने विधायकों को भोपाल में ही डटे रहने के सख्त निर्देश दिए हैं।
कांग्रेस को सता रहा है क्रॉस वोटिंग का डर
दूसरी तरफ, कांग्रेस इस सीट पर अपनी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की जीत को लेकर आश्वस्त होने का दावा कर रही है। शनिवार को हुई विधायक दल की बैठक में एकजुटता दिखाने की कोशिश तो की गई, लेकिन अंदरूनी तौर पर कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का सबसे बड़ा डर सता रहा है। भाजपा के इस मनोवैज्ञानिक दबाव पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा भाजपा हमेशा से खरीद-फरोख्त की राजनीति करती आई है और उसके पास इसके लिए अथाह संसाधन हैं। भाजपा को लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करना चाहिए, अन्यथा कांग्रेस ईंट का जवाब पत्थर से देगी।
जीत के लिए भाजपा को जरूरत होगी दस विधायकों की
भाजपा के पास वर्तमान में 164 विधायक हैं। राज्यसभा की दो सीटों को सुरक्षित जीतने के लिए उसे 116 वोटों की जरूरत है (58 वोट प्रति सीट)। इसके बाद भी भाजपा के पास 48 सरप्लस वोट बचते हैं। इस हिसाब से भाजपा को दस और विधायकों की जरूरत होगी तीसरी सीट के प्रत्याषी को जिताने के लिए। अगर दल-बदल के पेंच में फंसी विधायक निर्मला सप्रे और निर्दलीय कमलेश्वर डोडियार को मिलाकर यह संख्या 50 तक पहुंच सकती है। फिर भी भाजपा को जीत के जादुई आंकड़े (58) के लिए 8 अतिरिक्त वोटों की दरकार होगी। वहीं कांग्रेस के पास कुल 64 विधायक हैं। दतिया सीट खाली है और विजयपुर विधायक मतदान नहीं कर सकते। निर्मला सप्रे के वोट पर कांग्रेस को भरोसा नहीं है, जिससे उसके पास 61 प्रभावी वोट बचते हैं। उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को जिताने 58 वोट के बाद कांग्रेस के पास केवल 3 अतिरिक्त वोट बचेंगे।
