सीबीएसई कक्षा 9 वीं, 10 वीं में तीसरी भाषा अनिवार्य करने के फैसले पर रोक लगाएं
दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखा पत्र, रोक लगाने की मांग
भोपाल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर सीबीएसई कक्षा 9 और 10 के विद्यार्थियों के लिए तीसरी भाषा अनिवार्य करने के फैसले पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने बिना पर्याप्त तैयारी के मध्य सत्र में लिए गए इस निर्णय को दोषपूर्ण और सीबीएसई संचालन परिषद के पूर्व फैसलों के विपरीत बताया है।
दिग्विजय सिंह ने अभिभावकों के ज्ञापन का हवाला देते हुए उनकी चिंताओं को पूरी तरह जायज ठहराया। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि दिसंबर 2025 की बैठक में सीबीएसई संचालन परिषद ने सिफारिश की थी कि जब तक ग्रेडेड पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो जातीं, तब तक वर्तमान भाषा व्यवस्था ही लागू रखी जाए। इसके बावजूद, सीबीएसई ने 15 मई को परिपत्र जारी कर 1 जुलाई से कक्षा 9 में तीसरी भाषा अनिवार्य करने का निर्देश दे दिया। सिंह ने पत्र में इस नीति को जल्दबाजी में लागू करने से जुड़ी कई व्यावहारिक समस्याओं को रेखांकित किया है कि एनसीईआरटी ने अभी तक कक्षा 9 के लिए संबंधित भाषाओं की ग्रेडेड पुस्तकें जारी नहीं की हैं। सीबीएसई फिलहाल कक्षा 6 की किताबों से पढ़ाने की सिफारिश कर रहा है, जिससे शैक्षणिक ढांचा प्रभावित होगा। दक्षिण और पूर्वाेत्तर राज्यों में हिंदी व्यापक रूप से नहीं बोली जाती, और कई स्थानीय जनजातीय भाषाएं सीबीएसई की सूची में शामिल नहीं हैं। तीसरी भाषा के रूप में संस्कृत को अपनाने का दबाव बढ़ रहा है, लेकिन देश में योग्य संस्कृत शिक्षकों और उपयुक्त पाठ्य पुस्तकों का भारी अभाव है।
कोर्ट में सुनवाई लंबित, जल्दबाजी से बचने की अपील
दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि लाखों विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस नीति को तत्काल स्थगित किया जाए। उन्होंने ध्यान दिलाया कि इस मामले पर कोर्ट में सुनवाई लंबित है, जिसकी अगली तारीख 15 जुलाई तय है। ऐसे में कोर्ट के फैसले से पहले, 1 जुलाई से इस व्यवस्था को जबरन लागू करना छात्रों के हित में नहीं होगा। इस संवेदनशील विषय पर सरकार को गंभीरता से पुनर्विचार करना चाहिए।
