विवादित बयान पर अड़े आईएएस वर्मा, सरकार भेज रही प्रशिक्षण पर, उठ रहे सवाल
केंद्र की खामोशी, अब इंदौर कोर्ट के फैसले का इंतजार
भोपाल। ब्राह्मण लड़कियों को लेकर दिए गए विवादित बयान पर अड़े मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में नए सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले पांच महीनों से बिना किसी पोस्टिंग के लूप लाइन में चल रहे वर्मा को राज्य सरकार आगामी 15 जून से 10 जुलाई तक मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में मिड-करियर ट्रेनिंग के लिए भेज रही है। गंभीर आरोपों से घिरे एक अधिकारी को इस प्रतिष्ठित प्रशिक्षण के लिए चुने जाने के बाद सरकार के रुख और मंशा पर उंगलियां उठने लगी हैं।
अजाक्स संगठन के मंच से आरक्षण को लेकर विवादित टिप्पणी करने वाले आईएएस संतोष वर्मा ने सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) को अपना जवाब सौंप दिया है। सूत्रों के मुताबिक, वर्मा अपने बयान पर पूरी तरह अडिग हैं। उन्होंने साफ किया है कि एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह बात जरूर कही थी, लेकिन उनका उद्देश्य सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का नहीं था। हालांकि, उनके इस बयान से उपजा देशव्यापी आक्रोश अब भी थमा नहीं है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सस्पेंस केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के रुख को लेकर है। राज्य सरकार ने चार महीने पहले ही केंद्र को पत्र लिखकर संतोष वर्मा की सेवाएं समाप्त करने का अनुरोध किया था, लेकिन दिल्ली से अब तक कोई जवाब नहीं आया है। केंद्र की इस 4 महीने की खामोशी के बीच अब सामान्य प्रशासन विभाग की नजरें इंदौर में चल रहे अदालती मामले पर टिक गई हैं।
अदालत में चल रहा मामला
दरअसल, संतोष वर्मा पर राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस कैडर में पदोन्नति के लिए एक जाली अदालती आदेश का इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप है, जिसके लिए वे जेल भी जा चुके हैं। अब इंदौर कोर्ट का आने वाला फैसला ही यह तय करेगा कि वर्मा का आईएएस अवॉर्ड बरकरार रहेगा या नहीं। फिलहाल, जीएडी इस विधिक राय और मुख्य सचिव से चर्चा के बाद ही अगला कदम उठाएगा।
