स्कूल प्रबंधन समिति में 50 प्रतिशत महिलाओं को मिलेगी जगह
भोपाल। प्रदेश के स्कूलों में अब शिक्षा की व्यवस्था और विकास की कमान सीधे माता-पिता के हाथों में होगी। राज्य सरकार ने सभी स्कूलों को हाल ही में जारी स्कूल प्रबंधन समिति दिशानिर्देश-2026 को तत्काल प्रभाव से लागू करने का कड़ा निर्देश दिया है। नए नियमों के तहत अब स्कूल की समितियों में भारी फेरबदल करते हुए 75 फीसदी सदस्य माता-पिता होंगे, जिनमें से 50 फीसदी महिलाओं की भागीदारी’’ अनिवार्य कर दी गई है। यह कदम जमीनी स्तर पर स्कूली शिक्षा को और अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए उठाया गया है।
समग्र शिक्षा के तहत केंद्र सरकार के संशोधित ढांचे का पालन करते हुए, लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। नए नियमों के अनुसार, अब हर स्कूल में अलग-अलग काम कर रही समितियों को भंग कर उनकी जगह केवल एक एकीकृत स्कूल प्रबंधन समिति बनाई जाएगी। समिति में समाज के हर तबके की आवाज सुनिश्चित करने के लिए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, वंचित समूहों और दिव्यांग बच्चों के माता-पिता को प्रतिनिधित्व देना अनिवार्य कर दिया गया है।
सत्र शुरू होने के 1 महीने में गठन जरूरी
सरकार ने इस व्यवस्था को सख्ती से लागू करने के लिए समय-सीमा और जिम्मेदारियां भी तय कर दी हैं। स्कूलों को नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के महज एक महीने के भीतर इस समिति का गठन करना होगा। साथ ही, इसकी प्रगति की समीक्षा के लिए हर महीने बैठक आयोजित करना अनिवार्य होगा। यह समिति छात्रों के नामांकन, स्कूलों में उपस्थिति, सरकारी योजनाओं के लाभों के वितरण, छात्र सुरक्षा, समावेशी शिक्षा और जारी योजनाओं के क्रियान्वयन की सीधे तौर पर निगरानी करेगी।
स्कूल विकास की योजना बनाने का मिला अधिकार
नई गाइडलाइन ने समितियों को केवल कागजी न रखकर वित्तीय और प्रशासनिक रूप से मजबूत बना दिया है। अब यह स्कूल प्रबंधन समिति 30 लाख रुपये तक के निर्माण कार्यों की देखरेख खुद कर सकेगी। इसके अलावा, स्कूल के बुनियादी ढांचे, शैक्षणिक और वित्तीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक तीन वर्षीय स्कूल विकास योजना तैयार करने का पूरा अधिकार भी इसी समिति के पास होगा।
