अब जून के बजाय जुलाई में होगी भाजपा कार्यसमिति की बैठक
कार्यसमिति भी जल्द बनेगी, सदस्यों की संख्या होगी कम
भोपाल। मध्यप्रदेश भाजपा की बहुप्रतीक्षित नई प्रदेश कार्यसमिति के गठन की कवायद अंतिम दौर में पहुंच गई है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को संगठन की कमान संभाले लगभग 10 महीने बीत चुके हैं, लेकिन कार्यसमिति की घोषणा न होने के कारण अब तक पहली बैठक भी आयोजित नहीं हो सकी है। कार्यसमिति ना बनने के चलते यह बैठक अब जून के बजाय जुलाई माह में होगी।
प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद लंबा समय बीत गया, मगर खंडेलवाल अब तक अपनी कार्यसमिति नहीं बना पाए हैं। इसके चले कार्यसमिति की पहली बैठक ही नहीं हुई है। पहले जून महीने में प्रस्तावित प्रदेश कार्यसमिति की पहली बैठक को अब एक माह आगे बढ़ाकर जुलाई में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। यह बैठक धार्मिक नगरी ओरछा में होगी, जिसकी घोषणा प्रदेश अध्यक्ष पहले ही कर चुके हैं। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की ओर से इस बार कार्यसमिति का आकार बेहद छोटा और चुस्त-दुरुस्त रखने के सख्त निर्देश मिले हैं। यही वजह है कि संगठन के सामने श्किसे लें और किसे छोड़ें का बड़ा धर्मसंकट खड़ा हो गया है। पार्टी सूत्रों की मानें तो इस बार कार्यसमिति के सदस्यों की संख्या इतिहास में सबसे कम, यानी 110 से भी नीचे सिमट सकती है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी ‘शर्मा के समय सदस्यों की संख्या 463 थी। जबकि इसके पूर्व के अध्यक्षों के कार्यकाल में भी यह संख्या चार से ज्यादा हुआ करती थी।
33 प्रतिशत महिला कोटा अनिवार्य
पार्टी पदाधिकारियों की घोषणा काफी पहले ही की जा चुकी है, लेकिन अब मुख्य कार्यसमिति, स्थायी समिति और विशेष आमंत्रित सदस्यों का चयन होना बाकी है। इस बार चयन प्रक्रिया में संगठन को तीन मोर्चों पर कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। प्रदेश के सभी अंचलों (मालवा, निमाड़, बुंदेलखंड, ग्वालियर-चंबल, महाकौशल और विंध्य) को उचित प्रतिनिधित्व देना। संगठन में 33 फीसदी महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की अनिवार्य चुनौती।
