तीन स्वायत्त विश्वविद्यालयों में बंटेगा आरजीपीवी, हटेगा राजीव गांधी का नाम
मालवा, महाकौशल और मध्य भारत के नाम से जाने जाएंगे नए तकनीकी विश्वविद्यालय;
भोपाल। प्रदेश की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था में सरकार एक बड़ा और युगांतरकारी बदलाव करने जा रही है। भोपाल स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) का अस्तित्व अब तीन अलग-अलग हिस्सों में बदल जाएगा। बेहतर प्रबंधन और उच्च स्तरीय शिक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए सरकार ने विश्वविद्यालय को तीन भागों में बांटने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, स्थापना के 28 साल बाद इस प्रतिष्ठित संस्थान से पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत राजीव गांधी का नाम भी हटा दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई। आगामी कैबिनेट बैठक में इसे औपचारिक मंजूरी के लिए रखा जाएगा। इस फैसले के बाद प्रदेश की सियासत में भी उबाल आ गया है। विश्वविद्यालय के विभाजन के बाद भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में तीन नए स्वतंत्र मुख्यालय बनाए जाएंगे। इनका कार्यक्षेत्र और नाम भी तय किए गए हैं। इसके अनसार मध्यभारत प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय भोपाल, मध्य भारत के अंतर्गत आने वाले तकनीकी कॉलेज, मालवा प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उज्जैन मालवा और निमाड़ अंचल के तकनीकी कॉलेज और महाकौशल प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के जबलपुर के अंतर्गत पूर्वी मध्य प्रदेश (महाकौशल) के तकनीकी कॉलेज षामिल कि जाएंगे। तकनीकी यूनिवर्सिटी के साथ-साथ सरकार ने चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय को भी पुनर्गठित करने का फैसला किया है। इसे अब तीन के बजाय दो भागों में विभाजित किया जाएगा।
खर्च बढ़ेगा, पर प्रबंधन होगा मजबूत
बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों ने वित्तीय स्थिति को लेकर एक रिपोर्ट भी प्रस्तुत की। वर्तमान में आरजीपीवी की सालाना आय लगभग 70 करोड़ रुपये है, जबकि खर्च 50 करोड़ रुपये आता है। अधिकारियों के मुताबिक, विश्वविद्यालय को तीन अलग-अलग हिस्सों में बांटने से सालाना खर्च बढ़कर करीब 150 करोड़ रुपये हो जाएगा। हालांकि, बेहतर मैनेजमेंट और छात्रों की सहूलियत को सर्वाेपरि रखते हुए सरकार ने इस अतिरिक्त वित्तीय भार के बावजूद प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है।
कांग्रेस ने दी आंदोलन की चेतावनी
विश्वविद्यालय से राजीव गांधी का नाम हटाने के फैसले पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार के पास जनहित का कोई काम नहीं है, वह सिर्फ नाम बदलने की राजनीति कर रही है। विश्वविद्यालय का नाम राजीव गांधी के नाम पर ही रहेगा। अगर सरकार ने नाम हटाने या बदलने की कोशिश की, तो पूरे प्रदेश में उग्र विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
भाजपा को राजीव गांधी से इतनी परेशानी क्यों ?
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि भोपाल की आरजीपीवी यूनिवर्सिटी का नाम बदलना सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि भाजपा की वही पुरानी राजनीति है, काम कम, नाम बदलो ज़्यादा। सवाल यह है कि आखिर भाजपा को राजीव गांधी से इतनी परेशानी क्यों है? क्या इसलिए कि देश के डिजिटल और तकनीकी भारत की बुनियाद कांग्रेस सरकारों ने रखी थी? क्या इसलिए कि आज जिस आईटी और टेक्नोलॉजी इंडिया पर भाजपा श्रेय लेने की कोशिश करती है, उसकी शुरुआत राजीव गांधी के विज़न से हुई थी?
