भारत ने बहु-परमाणु हमला करने में सक्षम अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण किया
नई दिल्ली. Ministry of Defence ने शनिवार को घोषणा की कि भारत ने बहु-स्वतंत्र लक्ष्यभेदी पुनःप्रवेश प्रौद्योगिकी से लैस उन्नत Agni-5 मिसाइल का सफल परीक्षण किया है. इस अत्याधुनिक क्षमता के जरिए एक ही मिसाइल से अलग-अलग स्थानों पर मौजूद कई लक्ष्यों पर परमाणु हथियार ले जाए जा सकते हैं. इसे भारत की सामरिक प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत करने वाला बड़ा कदम माना जा रहा है.
यह परीक्षण शुक्रवार को ओडिशा स्थित Dr APJ Abdul Kalam Island से किया गया. रक्षा मंत्रालय के अनुसार मिसाइल को कई पेलोड के साथ परीक्षण किया गया, जिन्हें हिंद महासागर क्षेत्र में अलग-अलग भौगोलिक स्थानों पर स्थित लक्ष्यों की ओर निर्देशित किया गया था. मंत्रालय ने बताया कि परीक्षण के दौरान निर्धारित सभी मिशन उद्देश्यों को सफलतापूर्वक हासिल किया गया.
मिसाइल की उड़ान पर निगरानी के लिए जमीन और समुद्र आधारित कई ट्रैकिंग स्टेशनों का उपयोग किया गया. इन प्रणालियों ने मिसाइल के प्रक्षेपण से लेकर लक्ष्य तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी. मंत्रालय ने कहा कि इस सफल परीक्षण के साथ भारत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वह एक ही मिसाइल प्रणाली के जरिए कई रणनीतिक लक्ष्यों को साधने की क्षमता रखता है.
हालांकि सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से यह नहीं बताया गया कि अग्नि-5 का यह संस्करण कितने परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह चार से पांच वारहेड ले जा सकता है. रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने इस सफलता को देश की रक्षा तैयारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया और कहा कि इससे बढ़ते सुरक्षा खतरों के बीच भारत की सामरिक शक्ति और मजबूत होगी.
भारत ने पहली बार मार्च 2024 में बहु-लक्ष्यभेदी प्रौद्योगिकी से लैस अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण किया था. उस ऐतिहासिक परीक्षण को प्रधानमंत्री Narendra Modi ने “मिशन दिव्यास्त्र” नाम दिया था. इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया था जिनके पास ऐसी उन्नत मिसाइल प्रणाली मौजूद है. इस सूची में अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन जैसे देश शामिल हैं.
तीन चरणों वाले ठोस ईंधन इंजन से लैस अग्नि-5 मिसाइल की मारक क्षमता पांच हजार किलोमीटर से अधिक बताई जाती है. यह तकनीक पारंपरिक एकल वारहेड मिसाइलों की तुलना में कहीं अधिक विनाशकारी क्षमता रखती है क्योंकि इसमें एक ही मिसाइल से कई अलग-अलग लक्ष्यों को निशाना बनाया जा सकता है.
Defence Research and Development Organisation द्वारा विकसित अग्नि श्रृंखला में अग्नि-1, अग्नि-2, अग्नि-3 और अग्नि-4 जैसी मिसाइलें भी शामिल हैं, जिनकी मारक क्षमता क्रमशः 700 किलोमीटर, 2000 किलोमीटर, 3000 किलोमीटर और 4000 किलोमीटर तक है. अग्नि-5 प्रणाली में स्वदेशी एवियोनिक्स और उच्च सटीकता वाले सेंसर पैकेज लगाए गए हैं.
भारत की परमाणु नीति “पहले उपयोग नहीं” के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके तहत परमाणु हथियारों का इस्तेमाल केवल जवाबी कार्रवाई में किया जाएगा. भारत ने स्पष्ट किया है कि यदि उस पर परमाणु हमला होता है, तो उसकी जवाबी कार्रवाई बेहद व्यापक और विनाशकारी होगी. परमाणु हमले से संबंधित अंतिम निर्णय केवल नागरिक राजनीतिक नेतृत्व के अधीन परमाणु कमान प्राधिकरण द्वारा लिया जाता है.
भारत के पास जमीन, हवा और समुद्र तीनों माध्यमों से परमाणु हमला करने की क्षमता मौजूद है. हाल ही में भारतीय नौसेना ने परमाणु ऊर्जा से संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी INS Aridaman को भी सेवा में शामिल किया है. इसके साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो चुका है जिनके पास पूर्ण परमाणु त्रिकोणीय क्षमता मौजूद है.
अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक अध्ययनों के अनुसार भारत के परमाणु हथियारों का भंडार पाकिस्तान से बड़ा है, हालांकि चीन का परमाणु जखीरा अब भी भारत से काफी अधिक माना जाता है. वैश्विक सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि अग्नि-5 मिसाइल का यह सफल परीक्षण एशिया में बदलते सामरिक समीकरणों के बीच भारत की सैन्य शक्ति और प्रतिरोधक क्षमता को नई मजबूती देगा.
