सरकारी स्कूलों में स्वच्छता का संकट, बुनियादी सुविधा से वंचित भवन
करोड़ों के बजट आवंटन के बाद भी ढांचागत सुधार की रफ्तार सुस्त
भोपाल। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में स्वच्छता अभियान की जमीनी हकीकत चिंताजनक है। विभाग द्वारा करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाने के बावजूद करीब 25 हजार स्कूलों में आज भी बुनियादी शौचालय सुविधाओं का अभाव है। यह स्थिति तब है जब केंद्र और राज्य सरकारें स्वच्छ विद्यालय के नाम पर लगातार बजट आवंटित कर रही हैं।
आंकड़ों के अनुसार, प्रदेष के 19,400 प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में शौचालय नहीं हैं, जिनमें 9 हजार विशेष रूप से बालिकाओं के स्कूल हैं। उच्च माध्यमिक स्तर पर भी 7 हजार स्कूल इस संकट से जूझ रहे हैं। स्वच्छता के इस अभाव ने न केवल छात्रों के स्वास्थ्य को खतरे में डाला है, बल्कि स्कूलों में उनके बने रहने (रिटेंशन) पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। हैरानी की बात यह है कि जिन स्कूलों को 2025 में मरम्मत के लिए फंड दिया गया था, उन्हें ही जनवरी 2026 में फिर से बजट आवंटित करना पड़ा। जानकारी के अनुसार नया निर्माण कार्य के लिए 1,791 स्कूलों को 2.9 लाख प्रति स्कूल दिए गए, मरम्मत कार्य 3,850 स्कूलों को 20,000 प्रति स्कूल दिए गए। इस तरह अकेले प्राथमिक स्कूलों को ही लगभग 39 करोड़ की राशि वितरित की गई।
जिला समन्वयों को नोटिस भी दिए
पिछली समय-सीमा (जुलाई 2025) बीत जाने के बाद विभाग ने इस साल फरवरी तक का अल्टीमेटम दिया था, जिसका पालन करने में कई स्कूल विफल रहे। इस गंभीर लापरवाही पर राज्य शिक्षा केंद्र ने अब कड़ा रुख अपनाया है। काम में देरी और असहयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 12 जिलों के जिला परियोजना समन्वयकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
