विधानसभा अध्यक्ष के सामने पेश होने नहीं पहुंची विधायक निर्मला सप्रे
सिंघार बोले बीना की जनता को धोखा दे रही भाजपा
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में बीना विधायक निर्मला सप्रे के दल-बदल का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष आज होने वाली पेशी में विधायक के न पहुंचने पर विपक्ष ने तीखे तेवर दिखाए हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार जानबूझकर इस मामले को लटका रही है ताकि बीना में उपचुनाव से बचा जा सके। उन्होंने सीधे तौर पर विधानसभा अध्यक्ष की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए हैं।
हाईकोर्ट के निर्देशानुसार, विधायक निर्मला सप्रे को आज 22 अप्रैल को विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के समक्ष पेश होना था, लेकिन विधायक स्वयं उपस्थित नहीं हुईं, बल्कि उनकी ओर से उनके प्रतिनिधि विधानसभा अध्यक्ष कार्यालय पहुंचे थे। इससे पहले 9 अप्रैल की तारीख तय की गई थी, जिसे अध्यक्ष की व्यस्तता के कारण आगे बढ़ाया गया था। अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को हाईकोर्ट में होनी है। हालांकि उमंग सिंघार ने बताया कि उन्होंने आज फिर विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर से आग्रह किया है कि पूर्व में उनके द्वारा दिए गए सबूतों के आधार पर निर्णय लें।
हार के डर से चुनाव टाल रही भाजपा
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार बीना की जनता के साथ छल कर रही है। सिंघार ने कहा कि कांग्रेस ने विधायक के भाजपा में शामिल होने के पुख्ता सबूत पेश किए हैं, फिर भी कार्रवाई से बचा जा रहा है। नियमानुसार इस तरह के मामलों में 90 दिनों के भीतर फैसला होना चाहिए, लेकिन यहां समय को खींचा जा रहा है। सिंघार का दावा है कि भाजपा बीना में चुनाव हारने के डर से फैसला लेने में देरी कर रही है। उन्होंने कहा कि जब सारे सबूत सबके सामने हैं, तो कार्रवाई से क्यों कतरा रहे हैं? अगर विधानसभा अध्यक्ष फैसला नहीं लेंगे, तो हमें पूरा भरोसा है कि हाईकोर्ट इस पर अंतिम निर्णय लेगा। विधानसभा सचिवालय को अब अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश करनी है।“
क्या है पूरा मामला
कांग्रेस की टिकट पर बीना से विधायक चुनी गईं निर्मला सप्रे ने लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा का दामन थाम लिया था। इसके बाद कांग्रेस ने उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने की याचिका लगाई थी। मामला फिलहाल तकनीकी और कानूनी दांवपेच में फँसा हुआ है, जिसमें अब 29 अप्रैल की तारीख बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि विधानसभा सचिवालय को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
