लोकसभा सीटों के पुनर्वितरण पर अमित शाह का बड़ा बयान, दक्षिणी राज्यों की ताकत कम नहीं बल्कि बढ़ेगी
नई दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में सीटों के पुनर्वितरण यानी परिसीमन को लेकर उठ रहे विवादों के बीच स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है. उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया से किसी भी राज्य, खासकर दक्षिण भारत के राज्यों की ताकत कम नहीं होगी, बल्कि उनकी हिस्सेदारी में मामूली बढ़ोतरी ही देखने को मिलेगी.
लोकसभा में बोलते हुए अमित शाह ने बताया कि प्रस्तावित परिसीमन के तहत मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर करीब 815 से 850 तक किया जा सकता है. इसके साथ ही संसद में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का भी प्रावधान शामिल है. इस प्रस्ताव को लेकर विपक्ष और दक्षिणी राज्यों ने चिंता जताई थी कि जनसंख्या के आधार पर होने वाला यह बदलाव उत्तर भारत के राज्यों को ज्यादा फायदा पहुंचा सकता है.
इन आशंकाओं पर जवाब देते हुए शाह ने कर्नाटक का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि वर्तमान में कर्नाटक की 28 लोकसभा सीटें हैं, जो कुल प्रतिनिधित्व का लगभग 5.15 प्रतिशत है. परिसीमन के बाद यह सीटें बढ़कर 42 हो जाएंगी, जबकि प्रतिनिधित्व लगभग 5.14 प्रतिशत रहेगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि इससे राज्य का प्रभाव कम नहीं होगा.
इसी तरह आंध्र प्रदेश में 25 सीटों की संख्या बढ़कर 38 हो जाएगी और उसका प्रतिनिधित्व 4.60 प्रतिशत से बढ़कर 4.65 प्रतिशत हो जाएगा. तेलंगाना में 17 सीटों को बढ़ाकर 26 किया जाएगा, जिससे उसका प्रतिनिधित्व भी थोड़ा बढ़ेगा. तमिलनाडु के संदर्भ में अमित शाह ने विशेष रूप से कहा कि राज्य की ताकत में कोई कमी नहीं आएगी. उन्होंने बताया कि 39 सीटों वाला तमिलनाडु परिसीमन के बाद 59 सीटों के साथ लगभग 7.23 प्रतिशत प्रतिनिधित्व हासिल करेगा, जो पहले से अधिक है.
गृह मंत्री ने यह भी बताया कि पांचों दक्षिणी राज्यों की कुल सीटें 129 से बढ़कर 195 हो जाएंगी, जबकि उनका संयुक्त प्रतिनिधित्व 23.76 प्रतिशत से बढ़कर 23.87 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा. उन्होंने इसे इस बात का प्रमाण बताया कि परिसीमन से किसी क्षेत्र के साथ अन्याय नहीं होगा.
इस मुद्दे पर केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने भी पहले कहा था कि सभी राज्यों की सीटों में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी, ताकि संतुलन बना रहे और किसी को नुकसान न हो. हालांकि, प्रस्तावित आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों को अधिक सीटों का लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है.
सरकार का कहना है कि यह पूरा परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा और इसके जरिए संसद में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की लंबे समय से लंबित योजना को भी लागू किया जाएगा.
कुल मिलाकर, परिसीमन को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है, लेकिन सरकार लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि यह बदलाव संतुलित और न्यायसंगत होगा. आने वाले समय में इस मुद्दे पर संसद और राज्यों के बीच और गहन चर्चा होने की संभावना है.
