कांग्रेस जिलाध्यक्षों की सुस्ती पड़ेगी महंगी, आलाकमान ने दिए फेरबदल के संकेत
संगठन की मजबूती के लिए प्रदेश प्रभारी करेंगे चार दिवसीय मैराथन समीक्षा
भोपाल। प्रदेश कांग्रेस में संगठन को धार देने और जमीनी स्तर पर पार्टी को पुनर्जीवित करने के लिए अगले सप्ताह बड़े फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं। प्रदेश के 71 जिलाध्यक्षों के लिए 15 अप्रैल से अग्निपरीक्षा का दौर शुरू होने जा रहा है। प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी चार दिनों तक जिलाध्यक्षों के कामकाज का कच्चा-चिट्ठा खंगालेंगे। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट कार्ड के आधार पर सुस्त प्रदर्शन करने वाले जिलाध्यक्षों की छुट्टी की जा सकती है।
पार्टी के संगठन सृजन अभियान के तहत होने वाली यह समीक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। संगठन प्रभारी डॉ. संजय कामले के अनुसार, हालांकि पिछले दो महीनों में दो बार रिव्यू हो चुका है, लेकिन 15 अप्रैल से होने वाली बैठक निर्णायक होगी। इस प्रक्रिया की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कांग्रेस के केंद्रीय संगठन सचिव वामसी रेड्डी भी विशेष रूप से भोपाल पहुंच रहे हैं। 15 से 18 अप्रैल तक प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में चलने वाली इन बैठकों में हरीश चौधरी संभागवार चर्चा करेंगे। जिलाध्यक्षों को नियुक्ति के बाद संगठन विस्तार के लिए किए गए ठोस प्रयास,निचले स्तर (बूथ और पंचायत) तक कमेटियों का गठन, कार्यक्षेत्र में आने वाली चुनौतियां और उनका समाधान की जानकारी देनी होगी।
सड़क पर भी दिखेगी कांग्रेस
संगठनात्मक समीक्षा के साथ-साथ कांग्रेस सरकार को घेरने की रणनीति भी बना चुकी है। 16 अप्रैल को प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के निवास के सामने बड़ा विरोध प्रदर्शन होगा। इसमें मुख्य रूप से गेहूं खरीदी में देरी और किसानों की समस्याओं को मुद्दा बनाया जाएगा। वहीं 17 अप्रैल को प्रदेशभर के नवनियुक्त ब्लॉक अध्यक्षों का विशाल सम्मेलन होगा, जिसमें उन्हें जनसंपर्क की बारीकियां सिखाई जाएंगी। इसी दिन जिला और विधानसभा प्रभारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित होगा।
पंचायत स्तर तक पहुंच चुका है ढांचा
कांग्रेस का दावा है कि प्रदेश में उसका ढांचा अब लगभग पूर्णता की ओर है। प्रदेश की 23 हजार पंचायत समितियों में से 21 हजार से अधिक का गठन पूरा हो चुका है। अब पार्टी का पूरा फोकस इस विशाल नेटवर्क को सक्रिय कर जनता के बीच पैठ बनाना है।
